धर्मसंग्रह!
धर्मसंग्रह A book written by a poet Medhavi. 10 अधिकारों में बंद्ध कवि मेधावी (वि. 1541) की एक रचना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
धर्मसंग्रह A book written by a poet Medhavi. 10 अधिकारों में बंद्ध कवि मेधावी (वि. 1541) की एक रचना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शिव – Shiva. Name of the 13th Tirthankar (Jain-Lord) of past time, Name of a door of samavsharam(assembly of lord). भूतकालीन तेरहवें तीर्थंकर, समवशरण के तीसरे कोट के दक्षिण द्वार का नाम “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भग्नघट श्रोता – Bhgnaghata Srota. A type of false listener. अपात्र श्रोता का एक भेद; फूटे घड़े की तरह होना जिसमें उपदेश नहीं ठहरता “
धर्ममंत्र Auspicious mystic words. गर्भाधान आदि क्रियाओं में व्यवह्रत पीठिका और जाति मंत्र। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वचन प्रत्याख्यान – Vachan Pratyaakhyaana.: Utterance for not repeating something wrong. प्रत्याख्यान (त्याग) का एक भेद; में भविष्य में अपने व्रतों में अतिचार नहीं लगाऊंगा ऐसा बोलना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निष्प्राण – Nishpraana. Lifeless. निर्जीव अर्थात् जिसमें प्राण न हो “
धर्मचक्री Lord Jinendra having Dharmachakra ahead. जिनेन्द्र देव ; इनके आगे धर्मचक्र चलता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वक्ता –Vaktaa: Orator , Speaker , Instructor ,One well –versed in scriptures . शास्त्रों का व्याख्याता ;सर्वज्ञ तीर्थंकर केवली .श्रुतकेवली और आरातीय आचार्य वक्ता के तीन भेद हैं ” सामान्य रूप से किसी भी भाषण करने वाले को भी वक्ता कहते हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भुवनकीर्ति – Bhuvanakirti. Disciple of Acharya Sakalkirti and preceptor of Gyanbhushan. नन्दिसंघ बलात्कार गण में आचार्य सकलकीर्ति के शिष्य व ज्ञानभूषण के गुरु (ई. १४४२-१४६८) “
धरणेंद्र Name of the governing demigod of Lord Parshvanath. भगवान पाश्रर्वनाथ का शासन यक्ष, जिसने तपस्या करते समय उनका उपसर्ग निवारण किया था।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]