धर्मपाल!
धर्मपाल Name of a Bauddha philosopher. नालन्दा विश्वविद्यालय के आचार्य एक बौद्ध नैयायिक थे। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
धर्मपाल Name of a Bauddha philosopher. नालन्दा विश्वविद्यालय के आचार्य एक बौद्ध नैयायिक थे। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
धर्म अवर्णवाद Wrong or ill speaking about right religion. जिनेंद्र कथित अहिंसा धर्म में झूठे दोष लगाना, धर्म की निंदा करना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमार्जित- पिच्छी आदि कोमल उपकरण से साफ की हुई भूमि आदि। Pramarjita- Carefully purified place, body etc
धम्मरसायण A book written by a saint, Padmanandiji. मुनि पद्मनन्दि (ई.977) कृत का ग्रंथ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्येक भंग- जहां अलग-अलग भाव हो वह प्रत्येक भंग है। pratyeka bhamga – each part, different feelings.
धनधान्य प्रमाणातिक्रम Exceeding the set limits of grains, cattle and wealth (an infraction). परिगग्रह परिमाणव्रत का एक अतिचार, धन, गाय, भैस एवं धान्य पदार्थ संग्रह के लिए की हुई मर्यादा का उल्लंघन करना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्येक पद- जो भ्ज्ञाव एक जीव के एक काल में यगपत संभव हो ऐसे भाव प्रत्येक पद कहलाते है। pratyeka pada – feelings simultaneously existing of one in a praticular time period
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भक्ति – Bhakti. Eulogical devotion for Lord. अर्हत आदि के गुणों में अनुराग रखना भक्ति है अथवा निज परमात्म तत्त्व के सम्यक् श्रध्दान – अवबोध – आचरण स्वरूप शुद्ध रत्नत्रय परिणामों में अनुरक्त रहना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमदा- प्रमाद की बहुलवा से स्त्रियों को प्रमदा कहते हैं, समवषरण की नाट्यषाला। Pramada- Lustful women, Name of a stage of drama in Samavasharan- assembly of Lord