बहिर्चित्प्रकाश!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बहिर्चित्प्रकाश- बाह्य पदार्थो की ओर जिसकी दृटि हो। Bahircitprakasa- External knowledge
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बहिर्चित्प्रकाश- बाह्य पदार्थो की ओर जिसकी दृटि हो। Bahircitprakasa- External knowledge
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भक्ति – Bhakti. Eulogical devotion for Lord. अर्हत आदि के गुणों में अनुराग रखना भक्ति है अथवा निज परमात्म तत्त्व के सम्यक् श्रध्दान – अवबोध – आचरण स्वरूप शुद्ध रत्नत्रय परिणामों में अनुरक्त रहना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भवभिघ – Bhavabhidya. One destroyer of worldy transmigration, An epi- thet for the devotional prayer of Lord Arihant. संसार का भेदन करने वाली जिनभक्ति का विशेषण “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बालक्रिया- मिथ्यादृष्टि अज्ञानी जीवों द्वारा की जाने वाली आत्मशून्य क्रिया। Balakriya- activities done by wrong believers
द्वीपसागरप्रज्ञप्ति A type of scriptural knowledge (shrutgyan). अंग श्रुतज्ञान का एक भेद, दृष्टिवाद (12 वें अंग) का एक भेद; जिसमें असंख्यात द्वीप व सागरों का 52 लाख 36 पदों में वर्णन है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बनारस- 7 वें तीर्थकर सुपार्वनाथ एवं 23 वें तीर्थकर पाश्र्वनाथ की जन्म नगरी का ाम। यहाँ उनके क्रमश: 4 व 3 कल्याणक हुए है। Banarasa- A city; the birth place of lord Suparshavnath & Parshavnath
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मोक्षसप्तमी व्रत–Mokshasaptami Vrat. A famous fasting of Jains to be observed for 7 years. 7 वर्ष पर्यन्त प्रतिवर्ष श्रावण शु. 7(पार्श्वनाथभगवान् का मोक्षकल्याडक दिवस) को उपवास करना”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बाधा- इष्ट पदार्थो की उपलब्धि में अंतराय। Badha- Obstacle, Restriction, Difficulty
उदयापन्न To be in operation (of Karmic fruition). उदय को प्राप्त।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकृति सप्रतिपक्षी – Prakrti Sapratipaksi. Karmic natures having mutual contradictions. ६२ कर्म प्रक्रतियां आपस में विरोधिपना होने से सप्रतिपक्षी कही जाती हैं “