फूर्इ!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] फूर्इ- फफूंद (फूर्इ या फफूंद वाला अन्न अभक्ष्य है)। Phui- Mould, Fungus
[[श्रेणी:शब्दकोष]] फूर्इ- फफूंद (फूर्इ या फफूंद वाला अन्न अभक्ष्य है)। Phui- Mould, Fungus
त्रसकाय Mobile beings (two sensed to five sensed beings). स्थावर जीवों को छोडकर दो इन्द्रियों से पंचेन्द्रिय तक के जीव । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
आनयन Ordering, Ordering someone to bring something from outside of his mental resolve. किसी वस्तु को मांगना गुणव्रत का पहला अतिचार-नियम लिए हुए स्थान के बाहर के कुछ मंगाना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
तैतिल A country situated in Bharat kshetra (region). भरत क्षेत्र में स्थित एक देश। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संक्षेप दर्शनार्य – Sanksepa Darshanaarya. A kind of noble persons having ability to apprehend right perception by brief exposition only. दर्शनार्य के 10 भेदों में एक भेद; पदार्थों के संक्षिप्त कथन से ही सम्यग्दर्शन को प्राप्त होने वाले जीव “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंधु- भई इत्यादि; सांसारिक बंधनों के निमित्तभमत व्यक्ति, ये सुख-दुख दोनों के कारण होते है। Bandhu- Relative or attached one
तेईस सिंह Twenty three lions-the 1st dream of Bharat Chakravarti (an emperor) out of 16 dreams. भरत चक्रवर्ती को आए 16 स्वपनों में प्रथम स्वपन । इसका फल है वीर के अतिरिक्त 23 तीर्थंकरों के समय दुष्ट नयों की उत्पत्ति का अभाव होगा । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दक्षिणायन Period of the movement of the sun towards the south of equator (period between summer and winter solstices). सूर्य का ‘आदि ’ में पाया जाने वाला अयन दक्षिणायन एंव ‘अंन्त’ में पाये जाने वाला अयन उत्तरायन कहलाता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंधहेतु- मिथ्यादर्शन, अविरति, प्रमाद, कषाय, और योग ये समस्त बन्ध हेतु अर्थात् बन्ध के कारण है। Bandhahetu- Causes (different type of nature) of binding of karmas
तुल्य बल विरोध Having opposition equally. विरोध का एक प्रकार, ज्ञान को मान लेने पर सब पदार्थें का शून्यपना नहीं बन पाता है और सबका शून्यपना मान लेने पर स्वसंवेदन की सत्ता नहीं ठहरती है यह तुल्य बल विरोध है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]