षड्दिक् गति!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षड्दिक् गति – Saddika Gati. Six directional motion of beings, binded with Karmas. कर्मबद्ध जीवों का कर्मनिमित्तक षट्दिक अर्थात 6 दिशाओं में गमन होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षड्दिक् गति – Saddika Gati. Six directional motion of beings, binded with Karmas. कर्मबद्ध जीवों का कर्मनिमित्तक षट्दिक अर्थात 6 दिशाओं में गमन होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रासुक- जिसमे से एकेनिद्रय स्थावर जीव निकल गये हैं वह प्रासुक द्रव्य कहलाता है। Prasuka- Sterilized, boiled water, milk etc.
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == धनासक्ति : == धन धरती में गाडै बौरा, धूरि आप मुख लावे। मूषक साँप होइगो आखर, तातै अलठि कहावै।। —आनन्दघन ग्रंथावली : पद—४ मूढ़ मानव अपने धन का संरक्षण करने हेतु धन को जमीन में गाड़ता है और उस पर धूल डालता है किन्तु वस्तुत: वह धन के…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षट्खंडागम – Satkhandaagama. Six parts of great Jaina philosophical literature containing Karmic theory. कर्म सिद्धांत विषयक ग्रंथ; इसकी उत्पत्ति मूल द्वादशांग श्रुतस्कंध से हुई है ” इसके 6 खंड हैं (देखे- षट्खंड टीका) ” पहले खण्ड के सूत्र पुष्पदंत आचार्य (ई. 106-136) के बनाये हुए हैं, उनका शरीरान्तहो जाने के कारण शेष 4 खण्डों…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वृहतपल्य व्रत –VrhatapalyaVrata. A particular kind of vow to be observed with particular procedure. प्रत्येक माह मे ये कई व्रत आते हैं, यह एक वर्ष तक किया जाता है ” एक वर्ष मे इसके ७२ व्रत होते हैं ” इसमे एक – एक उपवास का पल्य – पल्य उपवास बराबर फल होता…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्वेताम्बर पराजय – Shvetaambara Paraajaya. Name of a book written by Pandit Jagannath. पंडित जगन्नाथ (ई.सन् 1646) कृत कवलि भुक्ति निराकृति विषयक एक रचना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंधच्छेद-बंध का नाश। Bandhaccheda- Bondage dissociation, Bond extermination
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावविशुध्दी – Bhavavisuddhi. Volitional purity. प्रत्याख्यान; राग द्वेष आदि अशुभ परिणाम का त्याग करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रोत्र (इंद्रिय) – Shrotra (Indriya). Ears, the hearing organ of the body. कर्ण इन्द्रिय “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रावचन – श्रुतज्ञान का अपरनाम। प्रवचन अर्थात प्रकृश्ट शब्द समूह द्वारा होने वाला ज्ञान या द्रव्यश्रुत प्रावचन कहलाता है। Pravacana- Another name of shrutgyan (scriptural knowledge)