उद्वर्तन!
उद्वर्तन Rising up (from lower living state). नरकगति व भवनत्रिकदेवगति से निकलना एंव उद्धार होना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
उद्वर्तन Rising up (from lower living state). नरकगति व भवनत्रिकदेवगति से निकलना एंव उद्धार होना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
जयवान् Name of the 5th saint among 7 particular saints (Saptarishis). सप्तऋषियों में ५वें ऋषि।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्याद्वादचंद्रिका टीका – Syaadvaadav Camdrikaa Tikaa.See- Niyamasaara Praabhrta.देखे- नियमसार प्राभृत।
थावर प्रतिमा Stable image of any thing. व्यवहार से चंदन, कनक, महामणि, स्फटिक आदि से बनी प्रतिमा थावर कहलाती है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
जन्मसंस्कार क्रियामंत्र Rituals for birth ceremony. एक गर्भाधान क्रिया ‘जन्म संस्कार’ के मंत्र ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्यादनेक प्रदेषत्व – Syaadanekatva Pradessatva. A matter with different dispositions (in some aspect).भेद कल्पना सापेक्ष अशुद्व द्रव्यार्थिक नय की अपेक्षा से एक ही द्रव्य मे अनेक प्रदेषो की उपलब्धि होना। धर्म, अधर्म, आकाश और जीवद्रव्य के अनेक या नाना प्रदेश स्वभाव है।
त्रैराशिकवाद Doctrine related to the conception of trio thoughts (like Jiva, Ajiva, Jiva-ajiva etc.). सर्व वस्तुओं को त्रयात्मक मानना अर्थात् तीन राशियों द्वारा चरण करने का सिद्धान्त जैसे जीव, अजीव , जीवाजीव, लोक , अलोक लोकालोक आदि। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्मृतयनुपस्थान – Smrtyanupasthaana. Non-concentration of mind. सामायिक व्रत का एक अतिचार है। चित्त की चंचलता से पाठ आदि को भूल जाना अर्थात् चित्त की एकाग्रता न होना व मन मे समाधिरुपता का न होना।
त्रिवेदसिद्ध Beings salvated from all genders (in accordance with Bhavved). भाववेद की अपेक्षा जो तीनों वेदों से सिद्ध होते हैं त्रिवेदसिद्ध कहलाते है । द्रव्य से पुरूष वेदी, भाव से स्त्री वेदी एंव नपुंसक वेदी भी सिद्ध पद को प्राप्त कर सकते है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]