एकट्ठी!
एकट्ठी A mathematical unit of numbers. एक गणितीय अंक इकाई (बादाल)2।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
एकट्ठी A mathematical unit of numbers. एक गणितीय अंक इकाई (बादाल)2।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परंपरा गुरू :Acharyas of Moolsangh in the tradition of Gautam Swami. गौतम स्वामी की परम्परा में मूलसंघ के आचार्यगण ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बाह्य कक्ष – Bahya Kaksa. Exterior cells. आंगन , बरामदा आदि “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परमार्थ बाह्म:Saint, who does not have the quality of differentiating self (Soul) & other.साधु जो भेदज्ञान न होने के कारण परमार्थ बाहय कहलाते है।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == श्रुत : == अर्हद्भाषितार्थं, गणधरदेवै: ग्रन्थितं सम्यक्। प्रणमामि भक्तियुक्त:, श्रुतज्ञानमहोदिंध शिरसा।। —समणसुत्त : १९ जो अर्हत् के द्वारा अर्थरूप में उपदिष्ट है तथा गणधरों के द्वारा सूत्ररूप में सम्यक् गुंफित है, उस श्रुतज्ञान रूपी महािंसधु को मैं भक्तिपूर्वक सिर नवाकर प्रणाम करता हूँ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सादृष्य प्रत्यभिज्ञान – Saadrsya Pratyabhijnnaana. Resemblance, similarity. स्मृति और प्रत्यक्ष के विषय भूत पदार्थों मे सादृश्यता दिखाते हुए जोड़ रुप ज्ञान का होना। जैसे यह गौ गवय के समान है।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == विरक्त : == भावे विरक्तो मनुजो विशोक:, एतया दु:खौघ—परम्परया। न लिप्यते भवमध्येऽपि सन् , जलेनेव पुष्करिणीपलाशम्।। —समणसुत्त : ८१ भाव से विरक्त मनुष्य शोक—मुक्त बन जाता है। जैसे कमलिनी का पत्र जल में लिप्त नहीं होता, वैसे ही वह संसार में रहकर भी अनेक दु:खों की परम्परा से…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सातवीं पृथ्वी – Saataveen Prthivee. The 7th hellish earth. महातमः प्रभा नाम की नरक पृथिवी, यह 8 हजार योजन मोटी है। इस पृथिवी से एक राजु नीचे लोक का अंत है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ब्रह्मोत्तर (स्वर्ग) – Brahmottara (Svarga ). The sixth heaven. छठा स्वर्ग; इस कल्प में एक लाख ४ हजार विमान हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विर्याचरण –Viryacarana Conduct according to the capability. सामथ्र्य के अनुसार आचार का पालन करना “