उद्भवन!
उद्भवन Exposure, Origination. उद्भव होना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संभव – Sambhava. Possible, Probable, Name of a planet, A type of deities. 88 ग्रहों में 52 वां ग्रह ” आकाशोपन्न देवों के 12 भेदों में अंतिम भेद “
ऋद्धिगौरव Expression of dignity, venerability. शिष्य पुस्तक कमण्डलु आदि के द्वारा अपना बड़प्पन या अभिमान प्रकट करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विरताविरत – Viratavirata. Those who have abandoned five partiaular sains partially (pertaining to partially restrained Jaina followers). देशसंयत या संयतासंयत ” हिंसा आदि ५ पापों का स्थूल रूप से त्याग करने वाले पंचम गुनस्थानवर्ती अनुवर्ती श्रावक “
आबाधा A time period between binding & fruition of Karmas. कर्म प्रकृति बंध होने के बाद जब तक उदयरूप व उदीरणा रूप वह कर्म प्रकृति हो तब तक का काल।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विभाव द्रव्य पर्याय – Vibhava Dravya Paryaya. Physical existence contrary to real nature. पर द्रव्य के निमित्त से जो प्रदेशत्व गुणों में विकार हो ” जैसे – जीव की नर – नारकादि पर्याय तथा स्कंध रूप पर्याय, पुद्ग्ल द्रव्य की विभाव द्रव्य पर्याय है “
आप्तमीमांसा विवृद्धि A book written by ‘Kumarsen’. कुमारसेन (ई. सन्696) द्वारा रचित एक ग्रंथ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बाह्य चिह्न – Bahya Cinha. External symbolic significances (reg. laugh,love , peace etc.). वस्तु की पहचान कराने वाले बाहरी चिन्ह जैसे – प्रसत्रचित रहना, धर्म से प्रेम करना, शुभ उपयोग रखना आदि धर्मध्यान के बाह्य चिह्न कहलाते है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भवनिमित्तक – Bhavanimittaka. Maturity of karmas (caused by any life course). A type of a Avadhigvan (clairvoyance). भव का निमित पाकर कर्मों का उदय में आना , भवप्रत्यय अवधिज्ञान भी भवनिमित्तक होता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रीभूषण – Shreebhoosana. Name of a Bhattarak, the writer of many books like Shantinath Puran, Pandav Puran etc. शांतिनाथ पुराण, पांडव पुराण, द्वादशांग पूजा तथा प्रबोध चिंतामणि के कर्ता एक भट्टारक “