स्रोतस्विनी!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्रोतस्विनी – Srotasvinii. River.नदी।
तत्वानुशासन A book written by Acharya Samantabhadra. आचार्य समंतभद्र (ई.श.2) द्वारा रचित एक ग्रंथ, जो न्यायपूर्वक तत्वों का अनुशासन करता है। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
जयधवला A book written by Acharya Yativrishabh. आचार्य यतिवृषभ(ई. १५०-१८०) कृत कषायपाहुड़ ग्रन्थ की ६०,००० श्लोक प्रमाण विस्तृत टीका है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्यादस्ति अवक्तव्य – Syaadasti Avaktavya. The 5th Bhang of saptabhangi-exposition of the nature of the substance in the expects of affirmation & indescribability.संप्तभंगी का 5 वां भंग-किसी अपेक्षा से है और किसी अपेक्षा से अवक्तव्य है अर्थात् स्वचतुष्टय (द्रव्य, क्षेत्र, काल, भाव) की अपेक्षा द्रव्य कथंचित् आस्ति रुप है और वही द्रव्य स्व एवं…
तक्षशिला Former name of the present city of Punjab ‘Taiksila’. वर्तमान टैक्सिला, उत्तर पंजाब का एक प्रसिद्ध नगर। सिंधु नदी से जेहलम तक समस्त प्रदेश का नाम तक्षशिला था, जिस पर सिकंदर के समय राजा अम्भी राज्य करता था। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
जटामुकुट Crown of matted and braided type of hair (pertaining to idols). प्रतिमाओं का लक्षण ‘ जटा मुकुट धारण न करना मोह के अभाव का प्रतीक है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सहभाव – Sahabhaava. Association, Co-existence. अविनाभाव के दो भेदों में एक भेद । साथ रहने वाले में तथा व्याप्य और व्यापक पदार्थो में सहभाव नियम नाम का अविनाभाव होता है। जैसे – द्रव्य व गुण में ।
चन्द्रकान्तशिला The cliffs of moon-stone having melting property. चन्द्रकान्त मणि से निर्मित एक शिला , ये शिलाएं रात्री में चन्द्रमा की किरणों का स्पर्श पाकर द्रवीभूत होने लगती हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
जगत्प्रतर Area of universe, unit of 49 Rajus. (जगतश्रेणी)२=४९ राजू , जगतश्रेणी के वर्ग को जगत्प्रर कहते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्मितगिरि – Smitagirrii. Name of a mountain of Bharat Kshetra (region).भरत क्षेत्रस्थ एक पर्वत।