भाव अशुध्द आहार!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव अशुध्द आहार – Bhava Asuddha Ahara. A fault related to saint – food . १६ उदगम दोषों से युक्त आहार ” साधु यदि आहार संबंधी १६ उदगम दोषों में किसी प्रकार का विकल्प करता है तो वह भाव से उद्दिष्ट आहार है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव अशुध्द आहार – Bhava Asuddha Ahara. A fault related to saint – food . १६ उदगम दोषों से युक्त आहार ” साधु यदि आहार संबंधी १६ उदगम दोषों में किसी प्रकार का विकल्प करता है तो वह भाव से उद्दिष्ट आहार है “
त्रिकाली पर्याय Practice of equanimity three times a day. तीन कालों में क्रम से होने वाली अनंत पर्यायें ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विलास – Vilasa. Flirthing, Merriment, enjoyment. आनंद, मनोरंजन “
गुणश्रेणी निर्जरा Multiple progression dissociation. जब कर्मों की निर्जरा प्रतिसमय क्रमशः असंख्यात गुणी संख्यात हो तो इसे गुणश्रेणी निर्जरा कहते हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नादग्रह – Nadagraha A part of the palace of deities भवनवासी देवों के भवनों में एक कक्ष ”
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == शिथिलाचारी : == सन्त्येकेभ्यो भिक्षुभ्य:, अगारस्था: संयमोत्तरा:। अगारस्थेभ्य सर्वेभ्य:, साधव: संयमोत्तरा:।। —समणसुत्त : २९८ यद्यपि शुद्धचारी साधुजन सभी गृहस्थों से संयम में श्रेष्ठ होते हैं तथापि कुछ (शिथिलाचारी) भिक्षुओं की अपेक्षा गृहस्थ संयम में श्रेष्ठ होते हैं।
खंडनखंडखाद्य A book written by ‘Shri Harsh’. वेदान्त साहित्य प्रवर्तक ‘श्री हर्ष ‘द्वारा रचित एक ग्रन्थ ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बोधायन – Bodhayana. Name of a commentator of Vedant literature. बादरायण के ब्रम्हसूत्र पर टीका लिखने वाले एक वेदांत साहित्य प्ररर्तक “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पृथत्त्क्व व्यवहार – Prthaktva Vyavahara. Nature of unity in diversity. व्यवहार का एक भेद; जहाँ पर भिन्न द्रव्यों में एकता का संबंध दिखाया जाता है उसे पृथत्त्क्व व्यवहार कहते हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव सामायिक – Bhava Samayika. Equanimity in pain & pleasure. सुख – दुःख में साम्यभाव धारण कर मैत्रीभाव के साथ सम्पूर्ण सावध से निर्वत्त ह्नुं, इन भावों के साथ सामायिक करना “