शुद्ध उपलब्धि!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुद्ध उपलब्धि – Shuddha Upalabdhi. Attainment of pure spiritual knowledge. निश्चयरूप ज्ञान की प्राप्ति या अन्तरातमा का प्रत्यक्ष अनुभव “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुद्ध उपलब्धि – Shuddha Upalabdhi. Attainment of pure spiritual knowledge. निश्चयरूप ज्ञान की प्राप्ति या अन्तरातमा का प्रत्यक्ष अनुभव “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुद्गल स्कन्ध – Pudgala Skandha. Aggregate of molecules (a bind form). जिन परमाणुओं ने परस्पर बंध कर लिया है वे स्कन्ध कहलाते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] युगपत – एक साथ जैसे केवल ज्ञान होने के बाद अनन्त ज्ञान व अनन्त दर्षन एक साथ ही होता है। Yugapata-Unitedly, Combinedly
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विशुध्दी लब्धि – Vishuddhi Labdhi. Attainment of passionfreeness causing right perception. सम्यक्त्व प्राप्त कराने वाली ५ लब्धियों में एक लब्धि, साता वेदनीय आदि शुभकर्मो के बंध योग्य परिणाम का नाम विशुध्दि है उसकी प्राप्ति होना विशुध्दि –लब्धि है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुद्गल अनुभाग – Pudgala Anubhaga. Fruitional power of Karmas (Pudgal). ज्वर आदि रोगों के उत्पन्न करने और विनाश करने का नाम पुद्गलानुभाग है, अर्थात् पुद्गलकर्मों के शुभाशुभ फल देने की शक्ति “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नकंबल – रत्नों से बना एक कंबल। उज्जैन की सेठानी यषोभद्रा ने अपने पु़त्र सुकुमाल की पत्नियों के लिए रत्नकंबल खरीदा और पुत्र वधुओं के लिए उसकी जूतिया बनवायी। देंखें – सुकुमाल चरित्र Ratnakambala-Blanket of jewels
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रज्ञप्ति – Pragyapati. Name of ruling female demigod of Lord Sambhavanath, A type of super power. सम्भवनाथ भगवान की शासन देवी का नाम, विधाधरों की एक विधा “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुण्य (तत्त्व) – Punya (Tattva) Merits, Pious qualities or elements. जीव के दया, दानादि रूप शुभ परिणाम जिससे आत्मा विशुद्ध हो पुण्य कहलाते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योगस्थान – योगषक्ति परिणमन के दर्जे इसके उपपाद एकांतानुवृद्धि परिणामयोग तीन भेद है। Yogasthana-The different grades of activities related to mind, speech & body
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == मरण : == एकं पण्डितमरणं, छिनत्ति जातिशतानि बहुकानि। तद्मरणे मत्र्तव्यं, न मृत: सुमृत: भवति।। —समणसुत्त : ५७० एक पंडित मरण (ज्ञानपूर्वक मरण) सैकड़ों जन्मों का नाश कर देता है। अत: इस तरह मरना चाहिए, जिससे मरण सुमरण हो जाए। एकं पण्डितमरणं, प्रतिपद्यते सुपुरुष: असम्भ्रान्त:। क्षिप्रं स मरणानां, करिष्यति…