वज्रनाराचसंहनन!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वज्रनाराचसंहनन – Vajranaaraachasanhanana. An osseous structure . 6 सहननों में दूसरा संहनन , जिसमें वज्रमय हड्डियों दोनों ओर वज्रमय नाराच अर्थात कील से जुडी होती हैं ” यह नामकर्म की एक प्रकृति है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वज्रनाराचसंहनन – Vajranaaraachasanhanana. An osseous structure . 6 सहननों में दूसरा संहनन , जिसमें वज्रमय हड्डियों दोनों ओर वज्रमय नाराच अर्थात कील से जुडी होती हैं ” यह नामकर्म की एक प्रकृति है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नेमिनाथ बसंत – Neminaath Basanta. Name of a book. बूचिराज (ई.शु.16) कृत नेमिनाथ भगवान के वैराग्य विषयक एक काव्य कृति “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शीतोष्ण – Sheetoshna. A kind of female genital organ (having to do with cold and hot). योनि के 9 भेदों में एक भेद; जो योनि शीत एवं उष्ण दोनों स्पर्श रूप होती है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नृत्यमाल – Nrtymaala. Ruling deity of Khandprapata, the summit of vijayardh mountain. विजयार्थ पर्वत के खण्डप्रपात कूट का स्वामी देव “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नीलक –Neelaka. Name of a deity resident of a summit ‘Shrivraksha’ situated in the west of Ruchakgiri (mountain). रुचकगिरी की पश्चिम दिशा में श्रीवृक्षकूट का निवासी देव “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संवेग – Sanvega. Mental agitation, Instinct, To have fear with the sufferings of wordly life. मन में उठने वाली भावना, अन्तःप्रेरणा, सम्यग्दर्शन के चार गुणों में से एक-संसार के दुःखों से नित्य डरते रहना अथवा पंचपरिवर्तन रूप संसार से भय उत्पन्न होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शिवसागर – Shivasaagara. Name of the 2nd pattacharya in the tradition of great Acharya Charitra Chakravarti Shri Shantisagarji, who was the disciple of Acharya Virsagar. चारित्रचक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी की परम्परा के द्वितीय पट्टाचार्य एवं प्रथम पट्टाचार्य श्री वीरसागर जी महाराज के प्रमुख शिष्य ” सन 1957 में ये आचार्यपट्ट पर आसीन हुए…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नीचगोत्र – Neechagotra. Group of low-caste persons. नीच कुल ” पर की निंदा करने से नीच गोत्र में जन्म होता है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकृति निरन्तर – Prakrti Nirantara. Karmic nature with continuous binding. कर्म प्रक्रतियां जो अंतर्मुहूर्त काल तक निरंतररूप से बंधती हैं वह निरंतर बंधी प्रक्रतियां कहलाती हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विरलन देय प्रक्रिया – Viralana Deya Prakriya. Spreading numbers (in the from of 1) and then distributing desired numbers at the place of 1. फैलाना और देना ” किसी संख्या के विरलन का अर्थ फैलाना अर्थात् उस संख्या को एक-एक में अलग-अलग करना ” देय का अर्थ है फैलाये गये अंकों में…