वसु!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वसु – Vasu.: A type of heavenly deities (Laukantik),Name of a king who went to hell because of telling lie.Eight in number. लौकंतिक देवों का एक भेद , एक राजा का नाम जो झूठ बोलने के कारण नरक में गया ,आठ की संख्या”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वसु – Vasu.: A type of heavenly deities (Laukantik),Name of a king who went to hell because of telling lie.Eight in number. लौकंतिक देवों का एक भेद , एक राजा का नाम जो झूठ बोलने के कारण नरक में गया ,आठ की संख्या”
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == श्रुत : == अर्हद्भाषितार्थं, गणधरदेवै: ग्रन्थितं सम्यक्। प्रणमामि भक्तियुक्त:, श्रुतज्ञानमहोदिंध शिरसा।। —समणसुत्त : १९ जो अर्हत् के द्वारा अर्थरूप में उपदिष्ट है तथा गणधरों के द्वारा सूत्ररूप में सम्यक् गुंफित है, उस श्रुतज्ञान रूपी महािंसधु को मैं भक्तिपूर्वक सिर नवाकर प्रणाम करता हूँ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वल्कल – Valkala.: Bark, skin of trees, A kind of believers in ignorantism. वृक्षों की छाल ,अज्ञानवादी के 67 भेदों में एक भेद “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == विरक्त : == भावे विरक्तो मनुजो विशोक:, एतया दु:खौघ—परम्परया। न लिप्यते भवमध्येऽपि सन् , जलेनेव पुष्करिणीपलाशम्।। —समणसुत्त : ८१ भाव से विरक्त मनुष्य शोक—मुक्त बन जाता है। जैसे कमलिनी का पत्र जल में लिप्त नहीं होता, वैसे ही वह संसार में रहकर भी अनेक दु:खों की परम्परा से…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वर्द्धमानचरित्र – Varddhamaana Charitra.: Name of a treatise related to the biography of Lord Mahaveera. तीर्थंकर महावीर के जीवन चरित से सम्बंधित एक संस्कृत ग्रन्थ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचगुरु भक्ति – Panchaguru Bhakti. A type of devotional prayer. 10 भक्तियों में पूज्यपाद कृत एक भक्ति “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ब्रह्मोत्तर (स्वर्ग) – Brahmottara (Svarga ). The sixth heaven. छठा स्वर्ग; इस कल्प में एक लाख ४ हजार विमान हैं “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मोक्षशास्त्र–Mokshshastr. Name of a treatise written by Acharya Umasvami. आचार्य उमास्वामी (ई.स. 179–243) कृत एक ग्रंथ का नाम” यह जैनधर्म का सारभूत ग्रंथ है और इस पर अनेक आचार्यो द्वारा अनेक टीकाएं लिखी गई”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भव्य – Bhavya. Splendid, Magnificent, one who is supposed to get salvation. जिसमें सम्यग्दर्शन आदि भाव प्रकट होने की योग्यता है वह जीव “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भद्रकलश – Bhadrakalasa. Name of the treasurer of Ram’. ८ वें बलदेव श्रीराम के कोषाध्यक्ष “