तदुभयाधिकरण!
तदुभयाधिकरण A type of substratum (underlying basis). अधिकरण का एक भेद जो विष, लवण, क्षार, टिुक, अग्नि आदि दस प्रकार का होता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
तदुभयाधिकरण A type of substratum (underlying basis). अधिकरण का एक भेद जो विष, लवण, क्षार, टिुक, अग्नि आदि दस प्रकार का होता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
खट्वांङ्ग Human skull placed on a bone (symbol of a terrific divinity). एक हड्डी पर मानव खोपड़ी का होना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
तत्वप्रकाशिका A book written by Acharya Yogendudeva. आय योगन्दुदेव (ईत्रशत्र 6) द्वारा रचित तत्वार्थ सूत्र की प्राकृत भाषाबद्ध एक टीका। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == गुरु : == सं किं गुरु: पिता सुहृदा योऽभ्यसूययाऽर्भं बहुदोषम्, बहुषु वा दोषं प्रकाशयति न शिक्षयति च।। —नीतिवाक्यामृत : ११-५३ वे गुरु, पिता व मित्र निन्दनीय या शत्रु सदृश हैं, जो ईष्र्यावश अपने बहुदोषी शिष्य, पुत्र व मित्र के दोष दूसरों के समक्ष प्रकट करते हैं और उसे…
तत्वार्थरत्नप्रभाकर A book written by Acharya Prabhachandra. आचार्य प्रभाचन्द्र 8 (ई.सन् 1432) द्वारा रचित एक गंथ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिवादी – Prativaadee. Respondent, defendant. प रतिपक्षी, विपक्षी “
चामुंडराय A prominent person, who got installed a huge idol (57 ft. high) of Lord Bahubali at Shravanbelgola. आपका एक नाम गोमट्ट था , आपने श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) में भगवान बाहुबली की विशालकाय प्रतिमा स्थापित करवाई थी ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == तीव्रकषायी : == आत्मप्रशंसनकरणं, पूज्येषु अपि दोषग्रहणशीलत्वम्। वैरधारणं च सुचिरं, तीव्रकषायाणां लिंगानि।। —समणसुत्त : ६०० अपनी प्रशंसा करना, पूज्य पुरुषों में भी दोष निकालने का स्वभाव होना, दीर्घकाल तक वैर की गाँठ को बांधे रखना—ये तीव्रकषाय वाले जीवों के लक्षण हैं।
गृद्धपिच्छ Another names of Acharya Kund-Kund and Acharya Umaswami. कुंदकुंद एवं उमास्वामी आचार्य का अपरनाम ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]