पंचेन्द्रिय जाति नाम कर्म!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचेन्द्रिय जाति नाम कर्म – Panchendriya Jaati Naama karma. A karmic nature causing five sensed beings. जिस नाम कर्म के उदय जीव पंचेन्द्रिय होता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचेन्द्रिय जाति नाम कर्म – Panchendriya Jaati Naama karma. A karmic nature causing five sensed beings. जिस नाम कर्म के उदय जीव पंचेन्द्रिय होता है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भिन्नपुर्वित्व ऋध्दी – Bhinnapurvitva Rddhi. A type of super natural power. एक प्रकार की ऋद्धि ” बुद्धि ऋद्धि के दशपुर्वित्व के दो भेदों में एक भेद “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मेघमालिनी–Meghamalini. A ruling female divinity of Himkut (a summit) of Nandan forest. नन्दनवन के हिमकूट की स्वामिनी दिक्कुमारी देवी”
ईषत्संसार World of non-salvated beings but free from birth-death cycle. अर्हंतावस्था या संयोगकेवली की पुनः जन्म न होने से जीवन मुक्त अवस्था एंव अभी मोक्ष न होने से ईषत्संसासर है। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाणिज्य कर्मार्य – Vaanijya Karmaarya.: Those having livelihood by trade of grains, gold etc. सावद्य कर्मार्य के 6 भेदों में एक 1 भेद ;जो अन्न ,वस्त्र ,सोना ,चांदी आदि के द्वारा आजीविका करते हैं “
एकत्वप्रत्यभिज्ञान Unitary recognition. स्मृति और प्रत्यक्ष के विशयभूत पदार्थ में एकता दिखाते हुए जोड़रूप ज्ञान ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
णमोंकार धाम Name of a newly built place of pilgrimage situated at Sanavad (M.P.) and constructed on the inspiration of Ganini Shri Gyanmati Mataji. इंदौर (मण्प्रण्) के निकट सनावद में सन् 1996 में गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से एंव क्षुल्लक श्री मोती सागर जी की भावनानुसार उनके ससंघ सानिघ्य में इस तीर्थ…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाचा उपकरण विवेक – Vaachaa Upakarana Vivek. Discrimination related to right speech. विवेक का एक भेद ,मैने इन ज्ञानोपकरणादि का त्याग किया ऐसा वचन बोलना “
गणधरवलय विधान Name of a worshipping composition composed by Ganini Shri Gyanmati Mataji. ‘णमो जीनाणं’ आदि गणधरवलय मन्त्रों पर आधारित पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा लिखित एक पूजन विधान ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यतिवृषभ–Yativrashabh. Name of a great Digambar Acharya who wrote many books like ‘Tiloy Pannati’ etc. कषाय प्राभ्रत के चूर्णसूत्र, तिलोय पण्णत्ति आदि के रचयिता एक आचार्य, ये आर्यमंक्षु व नागहस्ति के शिष्य (ई. 143–173) थे”