तद्भाव!
तद्भाव Intrinsic nature. गुण का गुण में अथवा पर्याय में सद्भाव या तद्रूपता ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
तद्भाव Intrinsic nature. गुण का गुण में अथवा पर्याय में सद्भाव या तद्रूपता ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रात्यकारी इन्द्रियाँ- जो इन्द्रियां पदार्थ को स्पृश्ट और बद्ध होकर जानती है वह प्राप्यकारी कहलाती है। जैसे-स्पर्षन, रसना, ध्राण एवं श्रोत्र इन्द्रियाँ। मात्र चक्षु इन्द्रिय आप्राप्यकारी होती है। PrapyakariIndriyan- Senses causing cognizance with actual experience concerning the particular subject
तदुभयाधिकरण A type of substratum (underlying basis). अधिकरण का एक भेद जो विष, लवण, क्षार, टिुक, अग्नि आदि दस प्रकार का होता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
ऊमर One of the figs – a fruit, not edible according to Jain philosophy . उदम्बर फलों में एक फल का नाम इनमें त्रस जीवों की योनिस्थान होने से अभक्ष्य हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्राणापान पर्याप्ति- छह पर्याप्तियों में एक पर्याप्ति इसे श्वासोच्छ्वास भी कहते है। PranapanaParyapti- Breathing vitality
तत्वप्रकाशिका A book written by Acharya Yogendudeva. आय योगन्दुदेव (ईत्रशत्र 6) द्वारा रचित तत्वार्थ सूत्र की प्राकृत भाषाबद्ध एक टीका। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
तत्वार्थरत्नप्रभाकर A book written by Acharya Prabhachandra. आचार्य प्रभाचन्द्र 8 (ई.सन् 1432) द्वारा रचित एक गंथ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बलिदत्त- सुपाश्र्वनाथ भगवान के मुख्य गणधर का नाम। (अपरनाम-बल, बलि, बलदत्त)। Balidatta- name of the chief discipline of lord suparshvanath.
चामुंडराय A prominent person, who got installed a huge idol (57 ft. high) of Lord Bahubali at Shravanbelgola. आपका एक नाम गोमट्ट था , आपने श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) में भगवान बाहुबली की विशालकाय प्रतिमा स्थापित करवाई थी ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]