द्रव्य पाप!
द्रव्य पाप Sinful nature of Karmas (substantive sin). कर्म की पाप रूप 100 प्रकृतियां ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्रव्य पाप Sinful nature of Karmas (substantive sin). कर्म की पाप रूप 100 प्रकृतियां ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाद – आलस्यकसाय सहित अवस्था को प्रमाद कहते है ” कसाय के तीव्र उदय से आछे कार्यो को करने में आदर भाव का न होना ” चार विकथा , चकाषाय, पञ्च इन्द्रियां , एक इस्नेह और एक निद्रा ये 15 प्रमाद है ” Pramada- Laziness, Carelessness, Negligence, 15 types of certain activities leading to…
द्रव्य ध्येय To concentrate mind on the virtuous matters. अध्यात्म वेत्ताओं के अनुसार 4 प्रकार के ध्येय पदार्थों में एक सत् या गुणपर्यायवान् पदार्थ में एकाग्र होना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्येक बुद्ध- स्वर्ग बुद्ध; वैराग्य का कारण देखकर स्वयं वैराग्य धारण करने वाले मुनि। pratyeka buddha – one who is self enlightened or self attained.
द्रव्य अप्रत्याख्यान Lust or desire for illusive matters. रागादि विषयों की आकांक्षा रूप अप्रत्याख्यान के दो भेदों में एक भेद।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाण (अनुयोग)- अग्रायणी पूर्व के 5 भेदों में एक भेद। Pramana (Anuyoga)- A part of scriptural knowledge (Purva)
द्यानतराय A writer who wrote number of books on Jainism. टागरा निवासी एक लेखक ‘पंडित’ जिन्होंने धर्मविलास, पूजापाठ व भक्ति स्तोत्र आदि अनेक ग्रंथों की रचना की। समय- ई. सन् 1676-1723।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्याहार- मन की प्रवृति का संकोच कर लेने पर मानसिक सन्तोश होता है उसे प्रत्याहार कहते है। pratyahara – mental satisfaction
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सहस्रपर्वा – Sahasraparvaa. Name of a superpower possessed by Nami & Vinami Vidyadhars. धरणेन्द्र द्वारा नमि व विनमि विद्याधरो को प्राप्त विद्या ।