पृथत्त्क्व व्यवहार!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पृथत्त्क्व व्यवहार – Prthaktva Vyavahara. Nature of unity in diversity. व्यवहार का एक भेद; जहाँ पर भिन्न द्रव्यों में एकता का संबंध दिखाया जाता है उसे पृथत्त्क्व व्यवहार कहते हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पृथत्त्क्व व्यवहार – Prthaktva Vyavahara. Nature of unity in diversity. व्यवहार का एक भेद; जहाँ पर भिन्न द्रव्यों में एकता का संबंध दिखाया जाता है उसे पृथत्त्क्व व्यवहार कहते हैं “
ऐलक A loin-clothed Jaina saint. जैन संत जो मात्र एक वस्त्र (लंगोट) धारण करते हैं केषलोच करते हैं एंव पिच्छी- कमण्डलु रखते है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सेना : == कार्यकृद् गृह्यको जन:। —त्रिषष्टिशलाका : १-१-९०८ जो कार्य (सेवा) करता है, लोग उसे पूजते ही हैं।
एकानंत Unidirectional finite (like ocean which seems to be endless). जिस एक पदार्थ को देखने पर उसका अंत नहीं पाया जाता उसको एकान्त कहते हैं जैसे अथाह समुद्र।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बालाग्र – Balagra. A area unit. क्षेत्र का प्रमाण विशेष ” अपरनाम केशाग्र “
एकयम A self restraint. सममायिक शुद्धि संयम, यह द्रव्यार्थिक रूप है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
गुणार्थिक नय Standpoint of accepting attributes of matter. द्रव्य सामान्य को ग्रहण कर।[[श्रेणी:शब्दकोष]]ने वाला नय
[[श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष ]] == जैन—दर्शन : == ण वि अत्थि अण्णवादो, ण वि तव्वाओ जिणोवएसम्मि। —सन्मति तर्क् प्रकरण : ३-२६ जैन दर्शन में न एकान्त भेदवाद मान्य है और न एकान्त अभेदवाद। अत: जैन दर्शन भेदाभेदवादी दर्शन है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव लेश्या – Bhava Lesya. Volitional aura. कषाय से अनुरंजित योग की प्रव्रत्ति होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नंदिनी – Namdina A city of the north of Vijayardh mountain , Name of a female beloved deity of a peripatetic Indra. विजयार्ध की उत्तर श्रेणी का एक नगर, गंधर्व व्यंतर के इन्द्र गितरस की वल्लभिकादेवी ”