पानकाहर!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पानकाहर- Panakahara. See- Panaka. देखें-पानक, यह आहार सल्लेखना के समय दिया जाता है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पानकाहर- Panakahara. See- Panaka. देखें-पानक, यह आहार सल्लेखना के समय दिया जाता है”
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == संसार : == धिक् संसारं यत्र, युवा परमरूपर्गिवतक:। मृत्वा जायते, कृमिस्तत्रैव कलेवरे निजके।। —समणसुत्त : ५११ इस संसार को धिक्कार है, जहाँ परम रूप-र्गिवत युवक मृत्यु के बाद अपने उसी त्यक्त मृत शरीर में कृमि के रूप में उत्पन्न हो जाता है। न नास्तीहावकाशो, लोके बालाग्रकोटिमात्रोऽपि। जन्ममरणबाधा, अनेकशो…
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यमकायिक– Yamkayik. A type of residential deities. भवनवासी आकाशोपन्न देव के 12 भेदो में से एक भेद”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योशिता – स्त्री, चक्रवर्ती के 14 रत्नो में एक रत्न। Yosita-A women one of the 14th Jewels of Chakravarti
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पात्र अपात्र:Worthy & non-worthy donees.सम्यक्त्व, शील और व्रत से सहित जीव पात्र एवं इनसे रहित जीव अपात्र कहलाते है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] यावानुद्देष – औद्देषिक आहार के 4 भेदो में एक भेद। Yavanuddesa-Food prepared with the intention of distributing to everyone
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकृति सांन्तर – Prakrti Santara. Karmic nature with momentary binding. जिन कर्म प्रकृतियों का एक समय बंध होकर द्वितीय समय में जिनका बंध विश्रांत हो जाता है वे सांतर बंधी प्रकृतियां कहलाती हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लघुरिक्थ – 2 के आधार वाला लघुगुणक। Laghuriktha- Logarithm to the base 2