पूर्वानुपुर्वी!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पूर्वानुपुर्वी – Purvanupurvi. Exposition of something with fundamental (root) method. आनुपूर्वी का एक भेद; जो वस्तु का विवेचन मूल परिपाटी द्वारा किया जाता है उसे पुर्वानुपुर्वी कहते हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पूर्वानुपुर्वी – Purvanupurvi. Exposition of something with fundamental (root) method. आनुपूर्वी का एक भेद; जो वस्तु का विवेचन मूल परिपाटी द्वारा किया जाता है उसे पुर्वानुपुर्वी कहते हैं “
घातांक Indices or Power (of a number). किसी गणितीय संख्या की घात का अंक ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुलोचना – Sulochanaa. Name of the chief Aryika (Ganini) in the Samavsharan(assembly) of Lord Parshvanath, The daughter of king akampan. भगवान पार्श्वनाथ के समवसरण की मुख्य आर्यिका (गणिनी) । अपरनाम सुलोका । राजा अकम्पन की पुत्री, स्वयंवर में भरत चक्रवर्ती के सेनापति जयकुमार ने इसका वरण किया था ।
चारित्र लब्धि Attainment of right conduct. यह व्रत १३ प्रकार के चारित्र की लब्धि के लिए किया जाता है . अहिंसा महाव्रत के १४ व, सत्य के ८ , अचौर्य के ८ , भाह्म्चार्य के २० , परिग्रह्त्याग के २४ , र५आत्रिभोजन त्याग का १ , ईर्यासमिति का १ , भाषा समिति के १० ,…
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मध्यम संख्यात- Madhyam Sankhayata. A mathematical term. एक गणितीय पद ” तीन, चार, पांच आदि एक कम उत्कृष्ट संख्यातपय्रत मध्यम संख्यात के भेद हैं “
घनोदधि Circle of humid atmosphere. लोक को वेष्टित करने वाले तीन वातवलयों में प्रथम वलय।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समधी – Samadhee. Father of a son or daughter-in-law, the relationship between two persons. वर-वधू के पिता आपस मे एक दूसरे के समधी कहे जाते है। इस शब्द का अर्थ समान बुद्वि वाले होने के कारण दोनो पक्षों मे आपसी ऊॅच-नीच का भाव नही होना चाहिए।
चमरी A special cow having a tale with beautiful and soft hair. एक विशिष्ट गाय , इसकी पूँछ के बाल सुन्दर और कोमल होते हैं . जिनसे चमर बनाए जाते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मधुस्त्रावी ऋद्धि – Madhusharvi Riddhi. A type of super- natural power causing freeness from all affliction of being by the hearing of a saint’s speech also it causes turning of tasteless food into sweet food. ऋद्धि; जिसके प्रभाव से ऋषि – मुनि के वचनों के श्रवण मात्र से मनुष्यतिर्यंच के दुखादिक नष्ट हो…