त्रिवलित!
त्रिवलित A fault or religious activities. कायोत्सर्ग का एक अतिचार, वंदना का एक अतिचार , कटि ग्रीवा, मस्तक, आदि पर तीन बल पड़ जाना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
त्रिवलित A fault or religious activities. कायोत्सर्ग का एक अतिचार, वंदना का एक अतिचार , कटि ग्रीवा, मस्तक, आदि पर तीन बल पड़ जाना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शिथिल – Shithila. Slack, Relaxes, Loosened, Inactive one. ढीला, सुस्त, द्रव्यलिंगी साधु; आहारादि सुखों में तल्लीन होकर जो मुनि रत्नमय में अपनी प्रवृति शिथिल या ढीली करता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निषद्या क्रिया – Nishadyaa kriyaa. Auspicious ceremony related to the seating of newly born baby with worshipping the Lord. गर्भान्वयक्रिया का 9 वां संस्कार; इस क्रिया में सिद्ध भगवान की पूजा विधिपूर्वक करके किसी शुद्ध आसन पर बालक को बैठना सिखाया जाता है “
चतुर्दश गुणस्थान Fourteen Gunsthan-stages of spiritual developments. १४ गुणस्थान ; मिथ्यात्व , सासादन , मिश्र , अविरत सम्यग्दृष्टि , देशाविरत , प्रमत्त , अप्रमत्त, अपूर्वकरण , अनुवृत्तिकरण, सूक्ष्म-साम्पराय , उपशांत मोह , क्षीणमोह , संयोगकेवली, आयोगकेवली ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चय समिति – Nishchaya Samiti. Absolute behaviour. अपने स्वरुप में सम्यक् प्रकार से गमन अथवा परिणमन करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शाश्वत सुख – Shashvata Sukha. Supreme or enternal bliss. अनंत सुख ” अर्थात सूक्ष्म लोभ का नाश होने से जो सूक्ष्म परिणाम शेष रह जाते हैं वह सूक्ष्म चरित्र है वह शाश्वत सुख का स्थान है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चय प्रोषधोपवास – Nishchaya Proshadhopavaasa. Engrossment into self with renouncing all kinds of food taking. मुनि अवस्था में चतुर्विध आहार छोड़कर आत्मा के ध्यान में निमग्नहोना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लंका – 1 जम्बुद्वीप के लवण समुद्र के अन्दर स्थित राक्षस द्वीप की नगरी यहां का राजा रावण था। 2 वर्तमान मं लंका नगरी जो भारत के दक्षिण में स्थित है जिसे श्रीलेका के नाम से जाना जाता है। रावण की लंका यह नही है क्योकि यह लवण समुद्र में थी। Lamka-name of a…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संयोजना सत्य – Sanyojana Satya. A type of truth misinterpretation of any similar subjects or objects. सत्य वचन के 10 भेदों में एक भेद; चेतन-अचेतन द्रव्यों का विभाजन नहीं करने वाले वचन द्वारा चेतन पदार्थों की विवक्षा न कर केवल चक्र के आकार में रची हुई सेना को चक्रव्यूह कहना “