स्वयंभू छंद!
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वयंभू छंद – Svatannbgyy Chammda. Name of an apbransh poetics written by poet Svayambhu. कवि स्वंयभू ई0 734-840 कृत 8 अघ्यायो वाला अपभं्रश छंद शास्त्र।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वयंभू छंद – Svatannbgyy Chammda. Name of an apbransh poetics written by poet Svayambhu. कवि स्वंयभू ई0 734-840 कृत 8 अघ्यायो वाला अपभं्रश छंद शास्त्र।
धर्मपत्नी A lawfully married woman. अपनी ही जाति की जिस कन्या के साथ अग्नि की साक्षीपूर्वक विवाह किया जाता है एंव जो पूजा प्रतिष्ठा धर्म आदि शुभकार्यों में साथ रहती है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मनुष्यक्षेत्र – Manushya kshetra. The human world. ढाईद्वीप; इससेबाहरमनुष्यकाजन्मनहींहोताहै ” इसकाविस्तार 45 लाखयोजनहै ” अपरनाम – नरकलोक , मनुष्यलोक, मर्त्यलोक “
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वद्रव्यादि ग्राहक द्रव्यार्थिक नय – Svadravyaadi Graahaka Dravyaarthika Naya. A standpoint accepting the real nature of a matter. जो नय स्वद्रव्यादि चतुष्टय की अपेक्षा से द्रव्य का सत् स्वरुप ग्रहण करे।
धर्म(पुरूषार्थ) One of the four essential duties of a householder i.e. to follow religion. 4 पुरूषार्थों (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) में प्रथम पुरूषार्थ; धर्म रूप चेष्टा जो सभी सुखों की दाता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वेदी शुध्दि–VediSuddhi A particular kind of ritual procedure of purifying the altar of a temple with the chanting of particular Mantras and 81 auspicious water pitchers. मंदिरों में भगवन को विराजमान करने वाली वेदी की सोभाग्यवती महिलाओ द्वारा घटयात्रा के पश्च्यात विशेष मन्त्रपूरक ८१ कलशो से की जाने वाली शुध्दि “
धनयकुमारचरित्र See – Dhanakumåracaritra. देखें – धनकुमारचरित्र।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विप्रतिपत्ति – Vipratipatti. Mutual controversial principles. एक वस्तु में परस्पर विरोधी दो वादों का नाम विप्रतिपत्ति है अथवा विपरीत निश्चय का नाम विप्रतिपत्ति है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्वप्न – Svapna. Dream, one of the 8 parts of causative knowledge (Nimittagyan).कल्याणवाद पूर्व मे वर्णित निमित्तज्ञान के 8 अंगो मे प्रथम अंग। स्वप्न दो प्रकार के माने गये है स्वस्थ स्वप्न और अस्वस्थ स्वप्न।
धनद Lord of wealth (Dhankuber), Name of a guardian deity (Lokpal). धन कुबेर, तीर्थंकर भगवान के पंचकल्याणकों में रत्नवृष्टि करने वाले एंव समवसरण की रचना करने वाले देव, चार दिशाओं में से उत्तर दिशा के लोकपाल का नाम ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]