वेदत्रय!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वेदत्रय –Vedatraya Triplet of gender (male, female & impotent) स्त्री, पुरुष, नपुंसक वेद “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वेदत्रय –Vedatraya Triplet of gender (male, female & impotent) स्त्री, पुरुष, नपुंसक वेद “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुरुदेवचंपू – Purudevacampu. Name of a book written by Arhaddas. अर्हद्दास (उत्तरार्ध ई. श. १३) द्वारा रचित ॠषभचरित्र विषयक एक ग्रंथ “
तीर्व Intense, Acute. भाव, क्रोधादि कषायों की तीव्रता को तीव्र भाव कहते हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रज्ञापनी – Pragyaapani. Most convient informatory language (easy preaching). एक भाषा; धर्मोपदेश करना ” यह भाषा अनेक लोगों को उद्देश्य कर कही जाती है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लिंग पाहुड – आचार्य कुन्दकुन्द कृत साधु के द्रव्य व भाव लिंग विशयक 22 गाथा निबद्ध ग्रंथ। Limgapahura-Name of a treatise written by Acharya Kundkund
[[श्रेणी:शब्दकोष]] भेदसंघात:Association-cum-dissociation related to karmic molecules. भेद अर्थात्स्कन्धों का टूटना एवं संघात होनाअर्थात्भित्र-भित्र परमाणुओं या स्कन्धों से मिलकर स्कंधों की उत्पत्ति होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लवणोदसिद्ध – क्षेत्र की अपेक्षा से लवण समुद्र से सिद्ध होने वाले जीव स्तोक है। Lavanodasiddha-salvated beings from the lavan ocean
[[श्रेणी:शब्दकोष]] भेद :Difference, type, division, separation, discrimination, disjunction. विरुध धर्मों एवं भित्र-भित्र कारणों काहोना यही भेद है “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सम्यक् चारित्र : == सम्यक्त्वरत्नभ्रष्टा, जानन्तो बहुविधानि शास्त्राणि। आराधनाविरहिता, भ्रमन्ति तत्रैव तत्रैव।। —समणसुत्त : २४९ किन्तु सम्यक्त्व रूपी रत्न से शून्य अनेक प्रकार के शास्त्रों के ज्ञाता व्यक्ति भी आराधनाविहीन होने से संसार में अर्थात् नरकादि गतियों में भ्रमण करते रहते हैं। श्रुतज्ञानेऽपि जीवो, वर्तमान: स न प्राप्नोति…