त्रिकाल!
त्रिकाल Past, Present and Future. भूत , भविष्य , वर्तमान। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वीतराग सम्यग्दर्शन –VitaragaSamyagdarsana. Right faith without any attachment. निश्चय सम्यग्दर्शन, वीतराग चारित्र के साथ अविनाभावी, जिस सम्यकत्व भाव में आत्मा की विशुध्दी, तन्मयता हो ” यह सातवें से दसवें गुणस्थान तक होता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोभाकुलता –Lobhaakulta A fault of meditative relaxation (greedful uneasiness in meditation). कायोत्सर्ग का एक दोष ;लोभ वश चित्त में विक्षेप होना “
उपसर्ग Calamity, State of affliction, Prefix. पर के निमित्त से आने वाली विपत्ति या संकट, उपसर्ग 4 प्रकार के हैं- मनुष्य, देव, तिर्यच, और प्रकृति कृत। शब्द विशेष की रचनाओं में शब्द के आगे लगाने वाले अक्षर विशेष को भी हिन्दी व्याकरण में उपसर्ग कहा जाता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नाटक समयसार – Nataka Samayasara A book written by pandit banarsidas. पं. बनारसीदास द्वारा समयसार पर रचित एक ग्रंथ “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाषा वर्गणा – Bhasha Vargana. See – Bhasha Dravya Vargana. देखें – भाषा द्रव्य वर्गणा “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोकेषणा –Lokeshnaa. Longing for worldly fame . लौकिक सुख की इच्छा “लोकप्रसिद्धि की भावना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वेदिकाबद्धा –Vedikabaddha An infraction of a particular sitting posture of meditative relaxation. कायोत्सर्ग का एक दोष; दोनों भुजाओं से दोनों घुटने बांधकर बैठना “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुक्तिपथ–Muktipath. Path of salvation. परिग्रह का त्याग मुक्तिमार्ग है”