गंध!
गंध Smell, Odour, Scent, Fragrance. जो सूंघा जाता है अर्थात् सुगंध या दुर्गन्ध । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
गंध Smell, Odour, Scent, Fragrance. जो सूंघा जाता है अर्थात् सुगंध या दुर्गन्ध । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बहुश्रुत भक्ति- 16 कारण भावना में एक भावना; उपाध्याय परमेष्ठी की भक्ति करना। Bahusruta Bhakti- Devotion for the scripture-proficients
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संरंभ – Sanranbha. Resolution for some activity. जीवाधिकरण का एक भेद; कार्य करने का संकल्प करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] फलिसंक्रमण- संक्रमण का एक भेद। Phalisankarmana- A type of transition
देह Body, a type of peripatetic celestial. शरीर, काया, पिशाच, जातीय व्यंतर देवों का एक भेद।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संयतासंयत – Sanyataasanyata. One having control & restraints with minor vows. एकदेश रूप व्रतों के या अणुव्रत के धारक जीव ” व्रती श्रावक, क्षुल्लक व ऐलक ये संयतासंयत कहलाते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संक्लिष्ट हस्तकर्म – Sanklishta Hastakarma. Hard manual work. छेदन-भेदन करना, पीसना, गूंथना, चित्र बनाना, खोदना आदि कार्य को संक्लिष्ट हस्तकर्म कहते है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रोषध – अश्टमी, चतुर्दषी आदि पर्व के दिन उपवास अथवा एक बार भेजन करना। Prosadha- Fasting or one time eating
गंधकुटी Seat of Lord in Samavashran – the holy assembly of Jaina lord. समावशरण के मध्य भगवान के बैठने का स्थान । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संकोच विस्तार – Sankoca Vistaara. The state of contraction & expansion of soul points of beings. जीव के प्रदेशों का संहार व विसर्पण ” दीप के प्रकाश के समान जीव के प्रदेशों का संकोच-विस्तार होता है “