विर्याचरण!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विर्याचरण –Viryacarana Conduct according to the capability. सामथ्र्य के अनुसार आचार का पालन करना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विर्याचरण –Viryacarana Conduct according to the capability. सामथ्र्य के अनुसार आचार का पालन करना “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मृगचारित– Mragcharit. Unrestrained saints (who make decisions by themselves). जो साधु अकेले ही स्वच्छंद रीती से विहार आदि करते है”
चरणानुयोग गृहमेध्यनगाराणां चारित्रोत्पत्तिवृद्धिरक्षाङ्गम्। चरणानुयोगसमयं सम्यग्ज्ञानं विजानाति।।४५।। अर्थ-सम्यग्ज्ञान ही गृहस्थ और मुनियों के चरित्र की उत्पत्ति, वृद्धि और रक्षा के अंगभूत चरणानुयोग शास्त्र को जानता है अर्थात् जिसमें श्रावक और मुनिधर्म का वर्णन किया जाता है, वह चरणानुयोग है। अथवा An Anuyog (a division of particular treatises) dealing with principles of conduct prescribed for the householders…
उभयाव्यतिरेकी That which refers to both extremes. हेतु का एक शब्द- अन्वयव्यतिरेकी जिसमें अन्वय दृष्टांत व व्यतिरेक दृष्टांत दोनों होते हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हेलित – Helita. Pushing & jostling and mocking at others while paying reverence (an infraction). वंदना का एक देष-वंदना के समय दूसरों को धक्का आदि देना या उनकी हंसी आदि करनां “
उदंबरफल Figs, Fruits of ficus genus class. ऊपर कठूमर पाकर बड़ पीपल आदि वृक्षों के फल ये त्रस जीवों के उत्पत्ति स्थान होने से अभक्ष्य हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हुंडकसंस्थान – Humdakasamsthaana. Misshaped structure of body. संस्थान के 6 भेदो मे एक भेद-विषम या बेडौल शारीरिक आकृति का बनना।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हिंसानंदी – Himmsaanammdi. A wicked concentration-to involve in violenceful activities with interest. रौद्रध्यान के चार भेदो मे एक भेद-तीव्र कषाय के वषीभूत होकर जीवसमूह को स्वंय मारने मे या दूसरे के द्वारा मारे जाने मे हर्षित होना और सदा हिंसा के कार्यों मे मन लगाये रखना हिंसौनंदी रौद्रध्यान है।