प्रत्येक भंग!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्येक भंग- जहां अलग-अलग भाव हो वह प्रत्येक भंग है। pratyeka bhamga – each part, different feelings.
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्येक भंग- जहां अलग-अलग भाव हो वह प्रत्येक भंग है। pratyeka bhamga – each part, different feelings.
धर्म भावना See – Dharma Anuprek¼å. देखें – अनुप्रेक्षा । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्येक पद- जो भ्ज्ञाव एक जीव के एक काल में यगपत संभव हो ऐसे भाव प्रत्येक पद कहलाते है। pratyeka pada – feelings simultaneously existing of one in a praticular time period
धर्मघोष A writer of ‘Chintamani Parshvanath Kalp’ etc. चिंतामणी पाश्र्वनाथ कल्पादि के कर्ता। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमदा- प्रमाद की बहुलवा से स्त्रियों को प्रमदा कहते हैं, समवषरण की नाट्यषाला। Pramada- Lustful women, Name of a stage of drama in Samavasharan- assembly of Lord
धरणीतिलक A city of Bharat Kshetra (region), A city in the south of Vijayardh mountain. भरतक्षेत्र का एक नगर, विजयार्ध की दक्षिण श्रेणी का एक नगर।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रभावना- सम्यग्दर्षन ज्ञान चारित्र रुप रत्नत्रय के प्रभाव से आत्मा को प्रकाषमान करना। ज्ञान,ध्यान, तप, दया, दान, जिन पूजा आदि के द्वारा जिनधर्म की महिमा को प्रकाषित करना। Prabhavana – Glorification, Promotion (influencing pertaining to religion)
धनराशि Set of positive quantity, Quantity which is to be added into the principal amount. जिस राशि को मूल राशि से जोड़ा जाये वह धनराशि कहलाती है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सहस्रनाम विधान – Sahasranaama Vidhanaa. A composition of worshipping hymn composed by Ganini Aryika Shri Gyanmati Mataji. श्री जिनसेनाचार्य द्वारा रचित सहस्रनाम स्तोत्र के आधर पर गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा सन 1954 में रचे गये 1008 मंत्रों के अर्थ को छन्दों में निबद्ध करके रचित 1008 अध्र्यो वाला विधान ।
धनंजय A Digambar Jain poet. दिगम्बर आम्नाय के एक कवि (धनंजय नाममाला, विषापहार स्त्रोत आदि के कर्ता) ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]