पृथिवीकायिक जीव!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पृथिवीकायिक जीव – Prthivikayika Jiva. Earth bodied creature; soul which lives in an earth body. जिस जीव के पृथिवी रूप काय विधमान है उसे पृथिवीकायिक जीव कहते हैं ” जैंसे –पत्थर आदि की खान “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पृथिवीकायिक जीव – Prthivikayika Jiva. Earth bodied creature; soul which lives in an earth body. जिस जीव के पृथिवी रूप काय विधमान है उसे पृथिवीकायिक जीव कहते हैं ” जैंसे –पत्थर आदि की खान “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भिन्नपुर्वित्व ऋध्दी – Bhinnapurvitva Rddhi. A type of super natural power. एक प्रकार की ऋद्धि ” बुद्धि ऋद्धि के दशपुर्वित्व के दो भेदों में एक भेद “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिविपला – Prativipalaa. A time unit. काल का एक प्रमाण विशेष ” 60 प्रतिविपलांश = 1 प्रतिविपला “
ईषत्संसार World of non-salvated beings but free from birth-death cycle. अर्हंतावस्था या संयोगकेवली की पुनः जन्म न होने से जीवन मुक्त अवस्था एंव अभी मोक्ष न होने से ईषत्संसासर है। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतियोगी – Pratiyogi Counter part, competitor, An opponent. विरोधी, साथी, बराबर वाला “
णमोंकार धाम Name of a newly built place of pilgrimage situated at Sanavad (M.P.) and constructed on the inspiration of Ganini Shri Gyanmati Mataji. इंदौर (मण्प्रण्) के निकट सनावद में सन् 1996 में गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से एंव क्षुल्लक श्री मोती सागर जी की भावनानुसार उनके ससंघ सानिघ्य में इस तीर्थ…
[[श्रेणी: शब्दकोष]] भैक्ष्यशुद्धि:Purity in procedural food taking. अचौर्य व्रत की एक भावना; शास्त्त्रोक्त विधि से शुद्ध भोजन ग्रहण करना “
गणधरवलय विधान Name of a worshipping composition composed by Ganini Shri Gyanmati Mataji. ‘णमो जीनाणं’ आदि गणधरवलय मन्त्रों पर आधारित पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा लिखित एक पूजन विधान ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिबोध – Pratibodha. Awaking knowledge; discernment, vigil. जागरण, जानकारी या ज्ञान, सम्यग्दर्शन-ज्ञान, व्रत और शील गुणों को उज्जवल करने, मॉल को धोने अथवा जलाने का नाम प्रतिबोध है “
उद्वर्तन Rising up (from lower living state). नरकगति व भवनत्रिकदेवगति से निकलना एंव उद्धार होना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]