भक्ति!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भक्ति – Bhakti. Eulogical devotion for Lord. अर्हत आदि के गुणों में अनुराग रखना भक्ति है अथवा निज परमात्म तत्त्व के सम्यक् श्रध्दान – अवबोध – आचरण स्वरूप शुद्ध रत्नत्रय परिणामों में अनुरक्त रहना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भक्ति – Bhakti. Eulogical devotion for Lord. अर्हत आदि के गुणों में अनुराग रखना भक्ति है अथवा निज परमात्म तत्त्व के सम्यक् श्रध्दान – अवबोध – आचरण स्वरूप शुद्ध रत्नत्रय परिणामों में अनुरक्त रहना “
इष्ट देवता Omniscient Lord, Desired deity . वीतरागी सर्वज्ञ हितोपदेशी अर्हंत देव।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आत्मवाद A doctrine of identity (reg. pervasion of a soul everywhere). एकांत मतों में एक मत जो मानता है कि एक ही परमात्मा रूप शक्ति है जो सर्व व्यापक है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भवभिघ – Bhavabhidya. One destroyer of worldy transmigration, An epi- thet for the devotional prayer of Lord Arihant. संसार का भेदन करने वाली जिनभक्ति का विशेषण “
इंद्रिय ज्ञान Sensory knowledge. मतिज्ञान-इन्द्रिय और मन की सहायता से उत्पन्न ज्ञान।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
द्वीपसागरप्रज्ञप्ति A type of scriptural knowledge (shrutgyan). अंग श्रुतज्ञान का एक भेद, दृष्टिवाद (12 वें अंग) का एक भेद; जिसमें असंख्यात द्वीप व सागरों का 52 लाख 36 पदों में वर्णन है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
आधुनिक भूगोल Modern Geography. पृथ्वी पर द्वीप, महाद्वीप, जलवायु, पहाड, नदी इत्यादि प्राकृतिक अवस्थाओं से संबंधित विषय।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
इतरेतराश्रय Mutual dependency. अन्योन्याश्रय-कारण का कार्य के व कार्य का उसी कारण के आश्रय होना यह एक दोष है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
उत्तरचूलिका An infraction of paying reverence (reg. criticism). वन्दना का एक अतिचार वन्दना को थोड़ी ही देर में समाप्त करके उसकी चूलिकारूप आलोचनादि को अधिक समय तक करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
इंद्रिय संयम Self restraint, desistance from sensual pleasure. पाँचों इन्द्रिय और मन को नियंन्त्रित कर अपने आधीन रखना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]