एकांतानुवृद्धि!
एकांतानुवृद्धि Complete development of body. नवीन शरीर धारण के दूसरे समय से लेकर एक समय कम शरीर पर्याप्ति के अन्तर्मुहूर्त समय तक जो योगस्थान हो वे एकांतानुवृद्धि हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
एकांतानुवृद्धि Complete development of body. नवीन शरीर धारण के दूसरे समय से लेकर एक समय कम शरीर पर्याप्ति के अन्तर्मुहूर्त समय तक जो योगस्थान हो वे एकांतानुवृद्धि हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राजमल सत्यवाक्य – ई 816 – 830 के एक राजा का नाम।इनके राज्यकाल में ही आचार्य विद्यानंदी नं 1 के द्वारा आप्त परीक्षा प्रमाणपरीक्षा युक्त्यानुषासन गंरथ लिखे गए। Rajamalla Satyavakaya-Name of a king
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शरीर बकुश – Sahreera Bakusha. A type of saints possessing some faults related to decoration of the body. बकुश साधु के दो भेदों में एक भेद; शरीर को साफ़ सुथरा रखने में जिनका विशेष उपयोग रहता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पर संग्रह नय :A standpoint of knowing supreme authority only.स्ंग्रहनय का एक भेद,जो महासत्ता मात्र को ग्रहण करता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राजमती विप्रलंभ – पं आषाधर द्वारा रचित एक संस्कृत गं्रथ।विशय – नेमिराजुल संवाद। Rajamati vipralambha-A book written by pandit Ashadharji
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शयन तप – Shayan Tapa. A kind of austerity (related to sleeping posture). कायक्लेश तप का एक भेद, इसके भी लगड़शय्या, अवाक्शय्या, शवशय्या, एकपाशर्वशय्या, अभ्रावकाशशय्या, ये 6 भेद हैं”
आभोग Conducting ritual activities with wrong intention. पूजा महत्व आदि की अभिलाषा से कापोत लेश्यायुक्त भावों द्वारा अति प्रकट अनुष्ठान करना अर्थात् गलत कार्रू करना आभोग है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] परमौदारिक शरीर:Body of Lord Arihant with absolute purity.अहंत परमात्मा का शरीर जिसमें निगोदिया जीव नहीं रहते ,धातु उपधातु सब शुद्व हो जाती है।
देवराज The king of deities, Father’s name of 18th Teerthankar (Jaina-Lord) Mahabhadra situated in Videh Kshetra (region). देवताओं के राजा इन्द्र, विदेह क्षेत्र में स्थित 18 वें तीर्थंकर महाभद्र के पिता का नाम।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
एकचर्या A vow for saints, solitary walking. मुनियों का एक व्रत, एकाकी विहार करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]