द्वयर्धगुणहानि!
द्वयर्धगुणहानि A type of decreasing series. गुणहानि आयाम को ड्योढ़ा (द्वयर्ध) करने पर जो प्रमाण प्राप्त हो। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्वयर्धगुणहानि A type of decreasing series. गुणहानि आयाम को ड्योढ़ा (द्वयर्ध) करने पर जो प्रमाण प्राप्त हो। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सामान्य उपयोग – Saamaanya Upayoga.. General perception, Another name of Darshanopyog. दर्शनोपयोग जो सामान्य अथवा सत्ता स्वभाव का ग्रहण करता है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परमावगाढ सम्यक्तवार्य :See – Paramavagarha Darsandrya.देखें – परमावगाढ़ दर्शनार्थ ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] साधन साध्य भाव – Saadhana Saadhya Bhaava. Relations related to means and goal. साध्य साधक भाव । व्यवहार सम्यक्त्व साधन या साधक है एवं निष्चय सम्यत्तव साध्य है।
ऋषभ Bull – identifying symbol of the first Jaina-Lord Rishabhadev. बैल- तीर्थंकर ऋषभदेव का चिन्ह।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] साता वेदनीय – Saata Vedaneeya. Pleasure giving karmas. वेदनीय कर्म के दो भेदो मे एक भेद। जिस कर्म के उदय से जीव को इन्द्रिय और मन सम्बन्धी सुख की प्राप्ति होती है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विरलन – Viralana. Destribution or spreading of numbers in the form of 1. किसी संख्या को एक –एक करके फैलाना “
तीर्थंकर भक्ति Name of a book written by Acharya Samant-bhadra. आचार्य समंतभद्र (ई. 120-185) ककृत स्तुति विद्या भक्ति स्तोत्र, अपरनाम जिनशतक। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]