भुज्यमान आयु!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भुज्यमान आयु – Bhujyamana Ayu. Present age. वर्तमान में जिस आयु को भोगा जा रहा है वह भुज्यमान आयु है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भुज्यमान आयु – Bhujyamana Ayu. Present age. वर्तमान में जिस आयु को भोगा जा रहा है वह भुज्यमान आयु है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पांडुक:A city situated in the north of vijayardha mountain, name of a deity of kundal mountain.विजयार्ध की उतर श्रेणी का एक नगर, कुण्डल पर्वत स्थित माहेन्द्र कूट का स्वामी नागेन्द्र देव।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावस्वाध्याय – Bhavasvadhyaya. Rethinking of spiritual contents. स्वाध्याय के द्वारा शुध्द आत्मा को अनुभव में लाना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विद्याश्रमण – Vidyasramana. Learned Jaina saints at the learning stage of 10th Purva (scriptural knowledge). जो मुनि दसवें पूर्व को पढते समय रोहिणी आदि लौकिक विद्याओं के प्रलोभन में न पड़कर दशपुर्व के पाठी होते हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पोन्न – Pona. A Kannad poet who wrote ‘shanti Purana Jinakshra Male. शांति पुराण जिनाक्षर माले के रचयिता एक कन्नड़ कवि (ई. ९७२) “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परंपरा बंध Continuity of binding of Karmas.ब्ंाध की निरन्तरता का नाम बंध परम्परा है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विवेक – Viveka. Prudence, Conscience, Judgement, Discretion. जिसमें राग हो ऐसे अन्न-पान आदि का त्याग करना दोषोंत्पाद्क द्रव्यादिकों का मन से अनादर करना, भले-बुरे का ज्ञान “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] परस्पराभाव:Mutual non-existence of matters.एक द्रव्य में दूसरे द्रव्य का अभाव होना।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पन्नग:A type of super knowledge, A type of deities of Nagkumar kind. एक प्रकार की विद्या, नागकुमार जाति के देव।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == वीतरागी : == कामानुगृद्धिप्रभवं खलु दु:खं, सर्वस्व लोकस्य सदेवकस्य। यत् कायिकं मानसिकं च किंचित् , तस्यान्तकं गच्छति वीतराग:।। —समणसुत्त : ७६ सब जीवों का, और तो क्या देवताओं का भी जो कुछ कायिक और मानसिक दु:ख है, वह काम—भोगों की सतत अभिलाषा से उत्पन्न होता है। वीतरागी उस…