निर्वाणकाण्ड- भाषा (पूज्य श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा अनुवादित )
निर्वाणकाण्ड भाषा ( पूज्य श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा अनुवादित ) चाल-हे दीन बंधु.......... वृषभेष गिरि कैलाश से निर्वाण पधारे।चंपापुरी से वासुपूज्य मुक्ति सिधारे।। नेमीश ऊर्जयंत से निर्वाण गये हैं।पावापुरी से वीर परमधाम गये हैं।।१।। इंद्रादिवंद्य बीस जिनेश्वर करम हने। सम्मेद गिरि शिखर से शिव गये नमूँ उन्हें।। इन चार बीस जिन की सदा वंदना...