वाक्शुद्धि!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाक्शुद्धि –Vaakshuddhi.: Renunciation of cruel speech or language controlling. कठोर कर्कश वचनों का त्याग कर सावधानी पूर्वक बोलना ” देखें –वचन शुद्धि “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाक्शुद्धि –Vaakshuddhi.: Renunciation of cruel speech or language controlling. कठोर कर्कश वचनों का त्याग कर सावधानी पूर्वक बोलना ” देखें –वचन शुद्धि “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचमेरु – Panchameru. Five auspicious adorable mountains with temples having number of Jaina idols. ढाई द्वीप सम्बंधी पांच मेरु (पर्वत)-सुदर्शन, विजय, अचल, मंदर, विद्युन्माली मेरु पर्वत पूजा; पाँचों मेरु (पर्वतों) पर स्थित अस्सी चैत्यालयों की समस्त प्रतिमाओं की पूजा “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पन्नालाल:A Pandit who wrote number of books. एक पंडित (ई0 1770-1840), उत्तरपुराण व राजवार्तिक की भाषा वचनिकाओं तथा विद्वद्जन बोधक आदि के कर्ता ।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == निर्जरा : == बंधपदेशग्गलणं निज्जरणं इदि जिणेहिं पण्णत्तं। जेण हवे संवरणं तेण दुणिज्जरणमिदि जाणे।। —वारस अणुवेसवा : ६६ बंधे हुए कर्म—प्रदेशों के क्षरण को निर्जरा कहा जाता है। जिन कारणों से संवर होता है, उन्हीं कारणों से निर्जरा होती है। यथा महातडागस्य, सन्निरुद्धे जलागमे। उत्सिंचनया तपनया, क्रमेण शोषणा…
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मोक्ष पुरुषार्थ –Moksha Purusharth. Reverential austerities for getting salvation. मोक्ष प्राप्ति के लिए किया जाने वाला तप आदि जो कि साक्षात् कल्याणप्रद है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचपरमेष्ठी – Panchaparameshthee. Five ultimate &supreme souls of Jaina stream (Arhant, Siddha, Acharya, Upadhayay & Sadhu). अर्हंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधू “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भगवती आराधना – Bhagavati Aradhana. Name of a book written by Achrya Shivakoti. आचार्य शिवकोटि (ई,श. १ ) कृत एक ग्रंथ ” इसमें जैन साधुओं की चर्या एंव सल्लेखना विधि का विस्तार से वर्णन है “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == जीवात्मा : == ववहारणयो भासदि, जीवो देहो य हवदि खलु इक्को। ण दु णिच्छयस्स जीवो, देहो य कदापि एकट्ठो।। —समयसार : २७ व्यवहार दृष्टि (नय) से जीव (आत्मा) और देह एक प्रतीत होते हैं किन्तु निश्चय दृष्टि से दोनों भिन्न हैं, कदापि एक नहीं।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वस्तुत्व – Vastutva.: Nature or reality of any matter or substance. वस्तु के भाव को वस्तुत्व कहते हैं (वस्तु सामान्य विशेषात्मकपना ) “