तप प्रायश्चित्त!
तप प्रायश्चित्त Austerity for atonement. गुरुजन द्वारा शिष्य के दोष को दूर करने के लिए दिया गया तप का आदेश। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
तप प्रायश्चित्त Austerity for atonement. गुरुजन द्वारा शिष्य के दोष को दूर करने के लिए दिया गया तप का आदेश। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैदर्भ –Vaidarbha A country of Bharat KshetraAryaKhand (region), Name of the prime chief disciple of Lord Chandraprabh&Lord Pushpadantnath. भरतक्षेत्र आर्यखंड का एक देश, तीर्थकर पुष्पद्न्तनाथ के प्रथम गणधर का नाम (अपरनाम – विदर्भ) “
तपकल्याणक The 3rd auspicious event of Tirthankars’ (Jaina Lord) lives (related to austerity). कल्याणक के पंच कल्याणकों में तृतरीय दीक्षा कल्याणक । इस कल्याण्वशसेष रूप से लौकांतिक देव आकर भगवान के वैराग्यभाव की प्रशंसा करतजे । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाद – Vaad. Debate, Competitive discussion. हार-जीत के अभिप्राय से की गई किसी विषय सम्बन्धी चर्चा “
एकादिूत्रिलघुक्रिया A method of poetics. छंद शास्त्र के 6 प्रत्ययों में एक प्रकरण।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
तद्विलक्षण Knowledge acquired by studying the scriptures (reg. extraordinariness). प्रत्यभिज्ञान का एक भेद, यह उससे विलक्षण है इस प्रकार का ज्ञान होना । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विपरीताभिनिवेश – Viparitabhinivesha. Wrong faith due to wrong conception. मिथ्यात्व के उदय से उत्पन्न विपरीत ज्ञान या श्रध्दान “
ततव समास Name of a treatise written by Maharshi Kapil. सांक्ष्य मत के मूल प्रणेता महर्षि कपलि की एक कृति का नाम।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] व्रद्धि ह्रास – Vrddhi – Hraasa Universal changes pertaining to the growth & destruction. भरत और ऐरावत क्षोत्तों में षटगुण हानि वृद्धि– हास रूप परिवर्तन जिसे उत्सर्पिणी और अवसर्पिणी काल के नाम से जाना जाता है “
तत्वार्थराजवर्तिक A book written by Acharya Aklanka Bhatta. आचार्य अकलंक देव (ई.620-680) द्वारा रचित एक ग्रंथ। [[श्रेणी:शब्दकोष]]