प्रतिष्ठापना शुद्धि!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिष्ठापना शुद्धि- देष व काल को जानकर नख, रोम, नाक, थमक, वीर्य, मल, मूत्र या देह परित्याग में जन्तु बाधा का परिहार करके प्रवृत्ति करना। pratisthapana suddhi – careful act of excretion
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिष्ठापना शुद्धि- देष व काल को जानकर नख, रोम, नाक, थमक, वीर्य, मल, मूत्र या देह परित्याग में जन्तु बाधा का परिहार करके प्रवृत्ति करना। pratisthapana suddhi – careful act of excretion
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रात्रिभोजनत्यागव्रत कथा – नेमिदत्त कृत एक गं्रथ। Ratribhojanatyagavrata katha-name of a religious book written by a celibate Brahamachari nemidatta
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूप्यमाषफल – तौल का प्रमाण विशेश। Rupyamasaphala-A weighing unit
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रदेश उदय- प्रकृति, स्थिति आदि की अपेक्षा उदय का एक भेद; कर्म प्रदेषों का उदय में आना। pradesa udaya – manifestation of karmic space points
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रोगपरिशहजय – 22 परिशहो में एक परिशह, असाध्य पीडा को उसके प्रतिकार की कामना रहित होकर साधु द्वारा समतापूर्वक सहन करना। रोग परिशह जय कहलाता हैं। Rogaparisaha Jaya-To bear afflictions of disease
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रयोगज परिणाम- आदिमान पिरणाम का एक भेद; जो परिणाम बाह्म निमित पर आश्रित हों । जैसे- ज्ञान,शील, भावना आदि का गुरु उपदेष के निमित से होना, अचेतन मिट्टी आद का कुम्हार आदि के प्रयोग से घटरुप परिणमन आदि। PrayogajaParinama- Results of practical experiments (like knowledge gained from preaching etc)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लब्ध राशि – प्राप्त की गई राषि। Labdha rasi-Gained amount or quantity of something
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमेयकमलमार्तड- उचाईं मधिक्यनन्दि (ई. 925-1023) कृत परीक्षामुख पर आचार्य प्रमानन्द ( ई. 950-1020) कृत एक टीका। इसकी हिन्दी दिसा गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से उनकी षिश्या आर्यिका श्री जिनमती माताजी ने की है। (समयबीसवीं ससदी का उŸाराद्ध)। Prameyakamalamartanda- A book written by acharyaprabhachand
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रोमज वस्त्र – वस्त्र के पांच प्रकारो अंडज, वोडज, रोमज, वक्कज, चर्मज में एक प्रकार, उन से बने वस्त्र। Romaja (vastra)-Woolen clothes
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाद प्रत्यय- कर्म बंध के 5 कारणों में एक कारण; षुभ कार्यो में आलस्य करना। PramadaPratyaya- carelessness in auspicious activities