आत्मख्याति!
आत्मख्याति A great commentary on ‘Samaysar’ written by Acharya Amritchandra. कुंदकुंदाचार्य कृत समयसार ग्रंथ पर संस्कृत में री अमृतचंद्र आचार्य कृत टीका।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आत्मख्याति A great commentary on ‘Samaysar’ written by Acharya Amritchandra. कुंदकुंदाचार्य कृत समयसार ग्रंथ पर संस्कृत में री अमृतचंद्र आचार्य कृत टीका।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बहुप्रदेशी – काय; जो बहुप्रदेशी होता है अर्थात् 6 द्रव्यों में 5 द्रव्य (जीव, पद्गल, धर्म, अधर्म और आकाश) बहुप्रदेशी होने से अस्तिकाय है। Bahupradesi- Something multi space pointing
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सत्यदत्त – Satyadatta. One of the 32 principles of modesty or courtesy, Name of the main listener in the assembely of Lord Dharmnath. एक विनयवादी, विनयवादियों के 32 भेदों में एक भेद, तीर्थंकर धर्मनाथ का मुख्य श्रोता या प्रश्नकर्ता “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बाला (देवी) – गजदंत कूट, पहद एवं वैमानिक इन्द्रों की देवी का नाम। Bala (Devi)- Name of female deities of Gajadant summit, of padma lake & of spatial Indras
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बलमद- 8 मदों में एक मद; मैं सहस्त्रभट, लक्षभट, कोटिभट हूँ इस तरह का अहंकार होना। Balamada- pride of possessing strength
उदासीन कारण Reasons of passiveness and neutrality. ऐसे कारण जो प्रेरक न हो जैसे धर्म अधर्म आदि द्रव्य जीव पुद्गल की क्रिया में उदासीन कारण हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बप्पदेव- आचार्य शुभनन्दि के शिाय जिन्दोंने षट्खण्डागम के प्रथम पाँच खण्डों पर व्याख्या प्रज्ञप्ति तथा कवाय पाहुड़ पर उच्चारणा नामक टीका लिखी। इस टीका के दर्शन करके श्री वीरसेन आचार्य ने धवला नामक टीका रची। समय- ई.श. 1। Bappadeva- An acharya who wrote many famous commentary
देशविरत Partial vow, Partial abstinence. पांचवां गुणस्थान , यहां श्रावक की 11 प्रतिमाओं का पालन होता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
आत्मव्यवहार Conception of self consciousness. मात्र अविचलित चेतना ही मैं हूँ ऐसा मानना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूपपरावर्तन विघा – रूप परिवर्तन करने में समर्थ विद्या। Rupaparavartana Vidya-A type of supernatural power of changing body