प्रत्यावली!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्यावली- आवली के ऊपर की जो दूसरी आवली है वह प्रत्यावली है। pratyavali – a time unit (reg. avali.)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्यावली- आवली के ऊपर की जो दूसरी आवली है वह प्रत्यावली है। pratyavali – a time unit (reg. avali.)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सहवृत्ति – Sahavritti. Tendency of co-asociation or co-association or co-inclination. समवृत्ति अर्थात् गुण और गुणी का साथ-साथ रहना अर्थात् उनका कथंचित् एकत्व -तादात्म्य सम्बंध ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रात्यकारी इन्द्रियाँ- जो इन्द्रियां पदार्थ को स्पृश्ट और बद्ध होकर जानती है वह प्राप्यकारी कहलाती है। जैसे-स्पर्षन, रसना, ध्राण एवं श्रोत्र इन्द्रियाँ। मात्र चक्षु इन्द्रिय आप्राप्यकारी होती है। PrapyakariIndriyan- Senses causing cognizance with actual experience concerning the particular subject
द्रव्यतीर्थ Place of pilgrimages. तीर्थंकरों की कल्याणक भूमियाँ, सिद्धक्षेत्र, अतिशयक्षेत्र आदि जिनकी वंदना – अर्चना संसार से तिरने में सहायक होती है। जैसे- अयोध्या, सम्मेदशिखर, कुण्डलपुर आदि।[[श्रेणी: शब्दकोष ]] तीर्थंकरों के पंच कल्याणकों से एवं महापुरुषों के तप- त्याग से पवित्र स्थलों को द्रव्यतीर्थ कहते हैं ।इस द्रव्यतीर्थ को जैन शास्त्रों में तीन भागों में…
ऊमर One of the figs – a fruit, not edible according to Jain philosophy . उदम्बर फलों में एक फल का नाम इनमें त्रस जीवों की योनिस्थान होने से अभक्ष्य हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्राणापान पर्याप्ति- छह पर्याप्तियों में एक पर्याप्ति इसे श्वासोच्छ्वास भी कहते है। PranapanaParyapti- Breathing vitality
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बलिदत्त- सुपाश्र्वनाथ भगवान के मुख्य गणधर का नाम। (अपरनाम-बल, बलि, बलदत्त)। Balidatta- name of the chief discipline of lord suparshvanath.
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विविक्त शय्यासन – Vivikta Sayyasana. Isolated place for sleeping or rest. पांचवां बाहा तप-व्रत की शुध्दि के लिए, पशु, स्त्री आदि से रहित एकांत प्रासुक स्थान में साधु के द्वारा ध्यान – अध्ययन के लिए शय्या व आसन ग्रहण करना “