लोकश्रेणी!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोकश्रेणी –Lokashrenee.: Seven Rajus, a mathematical measurement(according to Jainism) See- Jagatshrenee . 7 राजू ” देखें – जगत्श्रेणी “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोकश्रेणी –Lokashrenee.: Seven Rajus, a mathematical measurement(according to Jainism) See- Jagatshrenee . 7 राजू ” देखें – जगत्श्रेणी “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नियोग – Niyoga. Injuction. अनुयोग के 5 पर्यायवाची नामों में एक नाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राजसेना – राजा की सेना इसकी 18 श्रेणिया होती है। Rajasena- The army of a king
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुरगिरि – Suragiri. Another name of Sumeru mountain. सुमेरू पर्वत का अपरनाम ।
त्रिभंगी Three types of Karmic nature. कर्म प्रकृतियों के तीन भेद – बंध , उदय, सत्ता। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राजसूय – चक्रवर्ती सागर के समय मे प्रचलित राजाओं के द्धारा किया जाने वाला एक अनार्थ यज्ञ। महाकाल असुर के द्वारा हिंसा की प्रेरणा देने के लिए ये चलाया गया था। Rajasuya-Name of a violenceful yagya (sacrificial fire) prevalent at the time of Chakravarti sagar
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुमतिकीर्ति – Sumatikeerti. Name of a Bhattarak of Nandi group. नंदिसंघ बलात्कार गण ईडर गद्दी के एक भट्टारक । कृतियां पंचसंग्रह की संस्कृत वृत्ति , ज्ञानभूषण के साथ मिलकर ’क्रम प्रकृृति’ की टीका लिखी ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पारामार्थिक प्रत्यक्ष – Paramarthika Pratyaksha. Direct & supreme perception, transcendental knowledge. जो ज्ञान बिना किसी की सहायता से पदार्थ को स्पष्ट जानता है. सकल ज्ञान अर्थात् केवलज्ञान एवं विकलज्ञान अर्थात् अवधिज्ञान व मनःपर्यय ज्ञान पारमार्थिक प्रत्यक्ष हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लब्ध्यप्र्याप्तक – अपर्याप्तक नाम कर्म के उदय से जो जीव अपने योग्य पर्याप्तियों को पूर्ण किए बिना ही ष्वास के 18 वें भाग में मरण को प्राप्त हो जाता है अर्थात जिसके एक भी पर्याप्ति पूर्ण नही होती उसे लब्ध्यप्र्याप्तक कहते हैैं। Labdhyaparyaptaka-Absolutely, non development beings (Having very short life)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुकक्ष – Sukaksha. Name of the 31st city in the sourth of Vijayardh mountain. विजयार्ध की दक्षिण श्रेणी का 31 वां नगर ।