आयत चक्षु!
आयत चक्षु Wide – fully opened eyes. पूरी तरह से खुली आंखें।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पांडुक:A city situated in the north of vijayardha mountain, name of a deity of kundal mountain.विजयार्ध की उतर श्रेणी का एक नगर, कुण्डल पर्वत स्थित माहेन्द्र कूट का स्वामी नागेन्द्र देव।
दासत्व Servitude; being in the service of God. सेवकपने की भावना सम्यग्दृष्टि का वात्सल्य गुण सिद्ध प्रतिमा, जिनबिम्ब, जिनमन्दिर, चार प्रकार के संघ में और शास्त्रों में वात्सल्य भाव भी दासत्व कहलाता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यक्षवर(सागर द्वीप)– Yakshvar (Saagar Dvip). Name of a island and ocean of middle universe. मध्यलोक के अंतिम सौलह द्वीपों में तेरेहवा द्वीप व समुंद्र”
गति बन्धाभाव Lack of binding of any Karmic nature related to any Gati for the next birth (i.e. lack of transmi-gration), Motion without constraint. आगे के भव के लिए चारों गतियों के बन्ध का अभाव होना ,गति का एक भेद ; एरण्ड बीज आदि की गति ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] परस्पराश्रयत्व:Mutual dependence.एक दूसरे के आश्रित होकर रहना ।
तेंदु Name of an Indian tree, called initiation – tree of Lord Shreyansnath. श्रेयांसनाथ भगवान के दीखा वृक्ष का नाम (पदमपुराण के अनुसार) महापुराण के अनुसार यह तुम्बुरू वृक्ष है।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
देवकी The mother’s name of Lord Krishna. कंस की बहन जो वसुदेव को विवाही गई, कृष्ण की माता।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
त्रिधाकरण Three divisions of wrong (false) Karmas. मिथ्यात्व के तीन खंड करने की विधि को त्रिधाकरण कहते हैं मिथ्यात्व , सम्यक्मिथ्यात्व, सम्यक्प्रकृति। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]