स्वर्गवासी देव!
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वर्गवासी देव – Svargavaasii Deva. Heavenly deities. कल्पवासी देव-वैमानिक देव अर्थात् 16 स्वर्ग, 9 गै्रवेयक, 9 अनुदिष, 5 अनुत्तर के निवासी देव।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वर्गवासी देव – Svargavaasii Deva. Heavenly deities. कल्पवासी देव-वैमानिक देव अर्थात् 16 स्वर्ग, 9 गै्रवेयक, 9 अनुदिष, 5 अनुत्तर के निवासी देव।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] यषोधरा – रूचक पर्वत निवासिनी दिक्कुमारी देवी। Yasodhara-Name of a female divinity of Ruchak Mountain
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संधि – Sandhi. Alliance, union, Reconcillation, A treaty, Name of a planet, Joint of the body. संयोग, आपस का मेल, एक राजा का दुसरे राजा के साथ विशिष्ट शर्तों पर मैत्री भाव स्थापित करना, 88 ग्रहों में 33वां ग्रह (अपरनाम शांति), औदारिक शरीर में 300 संधि हैं “
एकोनविंशति A number, 19. 19- देशावधि की क्रमिक वृद्धि के 19 काण्डक।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यक्षसम्मोह– Yakshasammoh. A kind of peripatetic deities. पिशाच व्यंतरोका एक प्रकार”
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वयंभू छंद – Svatannbgyy Chammda. Name of an apbransh poetics written by poet Svayambhu. कवि स्वंयभू ई0 734-840 कृत 8 अघ्यायो वाला अपभं्रश छंद शास्त्र।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मनुष्यक्षेत्र – Manushya kshetra. The human world. ढाईद्वीप; इससेबाहरमनुष्यकाजन्मनहींहोताहै ” इसकाविस्तार 45 लाखयोजनहै ” अपरनाम – नरकलोक , मनुष्यलोक, मर्त्यलोक “
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वद्रव्यादि ग्राहक द्रव्यार्थिक नय – Svadravyaadi Graahaka Dravyaarthika Naya. A standpoint accepting the real nature of a matter. जो नय स्वद्रव्यादि चतुष्टय की अपेक्षा से द्रव्य का सत् स्वरुप ग्रहण करे।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योग्य मुद्रा – जिनेन्द्र देव की मुद्रा ध्यानादि के योग्य आसन, पर्यकासन जिनमुद्रा, मुक्ताषुक्ति सुखासन आदि मुद्रा। Yogya Mudra-Appropriate posture for meditation like lord Jinendra deva
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वेदी शुध्दि–VediSuddhi A particular kind of ritual procedure of purifying the altar of a temple with the chanting of particular Mantras and 81 auspicious water pitchers. मंदिरों में भगवन को विराजमान करने वाली वेदी की सोभाग्यवती महिलाओ द्वारा घटयात्रा के पश्च्यात विशेष मन्त्रपूरक ८१ कलशो से की जाने वाली शुध्दि “