वाणिज्य कर्मार्य!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाणिज्य कर्मार्य – Vaanijya Karmaarya.: Those having livelihood by trade of grains, gold etc. सावद्य कर्मार्य के 6 भेदों में एक 1 भेद ;जो अन्न ,वस्त्र ,सोना ,चांदी आदि के द्वारा आजीविका करते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाणिज्य कर्मार्य – Vaanijya Karmaarya.: Those having livelihood by trade of grains, gold etc. सावद्य कर्मार्य के 6 भेदों में एक 1 भेद ;जो अन्न ,वस्त्र ,सोना ,चांदी आदि के द्वारा आजीविका करते हैं “
एकत्वप्रत्यभिज्ञान Unitary recognition. स्मृति और प्रत्यक्ष के विशयभूत पदार्थ में एकता दिखाते हुए जोड़रूप ज्ञान ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रेशमी वस्त्र – रेशम से बने वस्त्र। Resami Vastra-Silky cloth
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाचा उपकरण विवेक – Vaachaa Upakarana Vivek. Discrimination related to right speech. विवेक का एक भेद ,मैने इन ज्ञानोपकरणादि का त्याग किया ऐसा वचन बोलना “
तीर्थस्नान To take bath in a holy river or place, Ceremonial bath. वैदिक परम्परानुसार गंगा आदि तीर्थे में स्नान करना, मिथ्यात्वादि दोषों से मलिन प्राणी ऐसे तीर्थस्नान से विशुद्ध नहीं हो पाता । जैनशासन के अनुसार अरिहंत परमेष्ठी द्वारा प्रतिपादित ज्ञानयपी गंगा में अवगाहन करना ही वासतविक तीर्थस्थान है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यतिवृषभ–Yativrashabh. Name of a great Digambar Acharya who wrote many books like ‘Tiloy Pannati’ etc. कषाय प्राभ्रत के चूर्णसूत्र, तिलोय पण्णत्ति आदि के रचयिता एक आचार्य, ये आर्यमंक्षु व नागहस्ति के शिष्य (ई. 143–173) थे”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचशिख – Panchashikha. Name of a sage, disciple of Asuri, A trumpt. आसुरि के शिष्य (ई.श.1) जिन्होनें सांख्य प्रवचन सूत्र एवं तत्व समास का बहुत विस्तार किया, दुंदुभी या तुरही “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मिश्रकेशी–Mishrakoshi. A female deity residing on ruchak mountain who serves the mother of Jaina Lord. रुचकपर्वतनिवासिनी दिक्कुमारी देवी” यह चमर लेकर जिन्मता की सेवा करती है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचमार्णव – Panchamaarnava. Kshirasagar (an ocean), the water of which is used for lastral bath of Tirthankars (Jaina-Lords). क्षीरसागर, इसके जल से तीर्थंकर का जन्माभिषेक किया जाता है “
उष्ण नामकर्म Heat producing karmas . जिस कर्म के उदय से शरीरगत पुद्गल स्कंधों में उष्णता होती है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]