परस्थान सन्निकर्ष!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] परस्थान सन्निकर्ष:A type of Sannikarsh-close contact (related to all 8 karmas).सन्निकर्ष का एक भेद, आठों कर्मो विषयक सन्निकर्ष।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] परस्थान सन्निकर्ष:A type of Sannikarsh-close contact (related to all 8 karmas).सन्निकर्ष का एक भेद, आठों कर्मो विषयक सन्निकर्ष।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लब्धिसंवेग संम्पन्नता – तीर्थकर कर्मबंध का छठा कारण रत्नत्रय जनित हर्श का नाम लब्धिसंवेग है। Labdhisamvega Sampannata-A kind of super enjoyment pertaining to Tirthankar (Jaina-Lord)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सचित्त योनि – Sachitta Yoni. Female genital organ. गुण योनि के 9 भेदों में एक भेद; जीव की उत्पत्ति का सचित्त स्थान “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शरीर कृशीकरण – Shareera Krisheekarana. An austerity related to mortification of body. कायाक्लेश तप; आचाम्ल, निर्विकृति, उपवास आदि के द्वारा शरीर को कृश करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योगमत – एक एकांन्तमत। संख्यादर्षन। Yogamata-name of a philosophy
उदयादि अवस्थित गुणश्रेणी आयाम A kind of stable geometric progression length related to Karmic destruction. परिणामों की विशुद्धि की वृद्धि से अपवर्तनाकरण के द्वारा उपरितन स्थिति से हीन करके अन्तर्मुहूर्त काल तक प्रतिसमय उत्तरोत्तर असंख्यातगुणित वृद्धि के क्रमसे कर्म प्रदेशों की निर्जरा के लिये जो रचना होती है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
देवभाव A chief disciple of Lord Rishabhdeva. भगवान् ऋषभदेव के चैरासी गणधरों में एक गणधार।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राजसेना – राजा की सेना इसकी 18 श्रेणिया होती है। Rajasena- The army of a king