संवेदन!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संवेदन – Sanvedana. Experiencing, Feeling. अनुभूति, ज्ञान “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शाप – Shaapa. Curse. क्रोधवश किसी के लिए अनिष्ट वचन कहकर दुराशीष देना ” जैन साधु किसी को शाप नहीं देते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चय नय – Nishchaya Naya. Absolute standpoint. जो नय वस्तु के असली स्वभाव या अभेद रूप को ग्रहण करता है “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुनि–Muni. The Jain saint–one having Jaineshvari Diksha (Jain–initiation). सामान्य रूप से निर्ग्रन्थ साधुओ को भी मुनि कहा जाता है” चारित्रसार ग्रंथ में ऋषि, मुनि, यति आदि भेदो द्वारा मनःपर्ययज्ञानी व केवलज्ञानी को भी मुनि कहा है”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विरुध्द हेतु – Viruddha Hetu. Contrary cause. जो हेतु साधन का खण्डन करे “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लौकिक मंगल –Laukika Mangal All auspicious significant articles-filled pitcher,white mustard,mirror etc. श्वेत सरसों ,भरा हुआ कलश ,वन्दनमाला ,क्षत्र ,दर्पण आदि “
उपादान Motive, Cause of existence of material . अन्तरंग कारण जो द्रव्य तीनों कालों में अपने रूप से और अपूर्वरूप से वर्त रहा है वह उपादान कारण है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्यय – Nishchaya. Absolute conception or belief, determination. परमार्थ की विशेष रूप से तथा संशयादीसे रहित अवधारणा निश्चय कहलाती है, दृढ़ विश्वास, असंदिग्ध अवधारणा “
तेईस वर्गणा 23 variforms or aggregates of karmic molecules. अणु वर्गणा, संख्याताणुवर्गणा, असंख्याताणुवर्गणा आदि 23 प्रकार की बर्गणाएं होती हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोभ (कषाय ) – Lobha (Kashaaya) Passion for prosperity (greed). चौथी कषाय ;इसमें धन सम्पति पाने की तीव्र लालसा या वृद्धि –इच्छा बनी रहती है “