मुनियज्ञ!
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुनियज्ञ–Muniyagya. See – Munigupta. देखे– मुनिगुप्त”
छायाराहित्य Shadowlessness; an excellence of Lord Arihant. अर्हन्त भगवान के जन्म का अतिशय ; छाया से रहित होना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वव्यापी – Sarvavyaapee. All-pervaded, omniscience. केवलज्ञान; उसमें समस्त पदार्थ प्रतिभासित होने से वह सर्वगत है।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == तपस्वी : == नाऽपि तुण्डितेन श्रमण:, न ओंकारेण ब्राह्मण:। न मुनिररण्यवासेन, कुशचीरेण न तापस:।। —समणसुत्त : ३४१ केवल सिर मुंडाने से कोई श्रमण नहीं होता, ओम् का जप करने से कोई ब्राह्मण नहीं होता, अरण्य में रहने से कोई मुनि नहीं होता, कुश—चीवर धारण करने से कोई तपस्वी…
छोटेलाल जैन Father’s name of Ganini Aryika Shri Gyanmati Mataji; a special personality (year 1906-1969) of Agrawal Jain caste resident of Tikaitnagar, U.P., got married with Mohinidevi of Mahmoodabad, U.P., and became father of 9 daughters & 4 sons. Among them 3 daughters Ku. Maina, Ku. Manovati, Ku. Madhuri & 1 son Ravindrakumar turned to…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वपदार्थ – Sarvapadaartha. All matters or substances. समस्त पदार्थ परोक्ष प्रमाणभूत श्रुतज्ञान के द्वारा सर्व पदार्थ जाने जाते है क्योकि लोकालोक का परिज्ञान व्याप्ति रूप से छद्मस्थों में भी पाया जाता है।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == क्रोध : == पासम्मि बहिणिमायं, सिसुं पि हणेइ कोहंधो। —वसुनन्दि श्रावकाचार : ६७ क्रोध में अंधा हुआ मनुष्य पास में खड़ी माँ, बहिन और बच्चे को भी मारने लग जाता है। कोवेण रक्खसो वा, णराण भीमो णरो हवदि। —भगवती आराधना : १३६१ क्रुद्ध मनुष्य राक्षस की तरह भयंकर…
चैत्यप्रासाद भूमि The first land of Samavasharan (the holy assembly of Lord Arihant). सम्वशरण की प्रथम भूमि ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वज्ञदेव – Sarvagyadeva. Omniscience (Lord Arihant, Siddha). केवली आप्; जो त्रिकालवर्ती गुण पर्यायो से संयुक्त समस्त लोक और अलोक को प्रत्यक्ष जानते है वह सर्वज्ञदेव है अर्थात् अर्हत व सिद्व।