वेषभूषा :!
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == वेषभूषा : == वेषोऽपि अप्रमाण:, असंयमपदेषु वर्तमानस्य। किं परिर्विततवेषं, विषं न मारयति खादन्तम्।। —समणसुत्त : ३५६ (संयम मार्ग में) वेश प्रमाण नहीं है, क्योंकि वह असंयमीजनों में भी पाया जाता है। क्या वेश बदलने वाले व्यक्ति को खाया हुआ विष नहीं मारता ?