द्वीपसागर सिद्ध!
द्वीपसागर सिद्ध The soul who gets salvation from some island, ocean. द्वीप-सागर से मुक्त होने वाले जीव।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्वीपसागर सिद्ध The soul who gets salvation from some island, ocean. द्वीप-सागर से मुक्त होने वाले जीव।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
उत्तरगुण Secondary virtues of saints. मूलगुणों के अतिरिक्त पाले जाने वाले गुण उततरगुण कहलाते हैं। जैसे-मुनियों के 84 लाख गुण।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पांशुमूलिक विद्या:A type of knowledge of vidyadhara.विद्याधर वंश की एक विद्या का नाम।
उदयभावी क्षय Destruction of karmas without their fruition. बिना फल दिये आत्मा से कर्मों का संबंध छूट जान।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संसारानुप्रेक्षा – Sansaaraanuprekshaa. Contemplation about the wordly troubles. 12 भावनाओं में एक भावना; संसार के स्वभाव एवं संसार परिभ्रमण का अर्थात् दुःखमय स्वरुप का चिंतन करना “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूलसंघ–Mulasangh. An ancient group of Digambar Jain saints (associated after the salvation of Lord Mahavira). दिगम्बर जैनसाधुओका प्राचीन संघ; जिनके आचार्यो की पट्टावली में प्रथम श्री कुन्दकुन्द आचार्य का नाम लिया जाता है”
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मिश्र भाव–Mishra Bhav. A kind of reflection related to both destruction & subsidence of Karmas. क्षायोपशामिक भाव, जिसमे कर्मो का क्षय और उपशम दोनों होते है”
द्विचूड़ A king of Vidyadhar dynasty. विद्याधर वंश का एक राजा। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] परस्थान संक्रमण:Particular transition to other place (reg. other sangrah Krishti).संक्रमण का एक भेद । दूसरी अन्य संग्रह कृष्टियों में या पर रूप परिणमन करना ।
द्वादशवर्षी दुर्भिक्ष Twelve years dearth or famine which caused the origination of the Shvetambar Jain sect. वीर निमार्ण के 133 वर्ष पश्चात् अर्थात् आज से लगभग 2400 वर्ष पूर्व पंचम श्रुतकेवली ‘भद्रबाहु’ के काल में उज्जैन आदि उत्तरभारत के क्षेत्रों में 12 वर्षीय दुर्भिक्ष (अकाल) पड़ा, जिसकी आचार्य भद्रबाहु द्वारा भविष्यवाणी सुनकर सभी दिगम्बर मुनि…