प्रत्येक वनस्पति काय!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्येक वनस्पति काय- प्रत्येक वनस्पति कायिक जीव द्वारा छोड़ा गया शारीर अभवा पृथक-पृथक वनस्पति जीव जैसे; खैर आदि वनस्पति। pratyeka vanaspati kaya – beings pretaining to plant life.
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्येक वनस्पति काय- प्रत्येक वनस्पति कायिक जीव द्वारा छोड़ा गया शारीर अभवा पृथक-पृथक वनस्पति जीव जैसे; खैर आदि वनस्पति। pratyeka vanaspati kaya – beings pretaining to plant life.
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संयमलब्धि – स्थान – Sanyamalabdhi – Sthana. The stage for the attainment of restraints. जिस अवस्था विशेष में संयम लब्धि ठहरती हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाण योजन- क्षेत्र का प्रमाण विषेश। PramanaYojana- An area unit
त्रसनाड़ी A channel or tunnel of mobile beings. लोक के बहु मध्य में एक राजु लम्बा और कुछ कम तेरह राजु ऊंचा बस जीवों का निवास क्षेत्र । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सहस्रार – Sahasraara. Name of the 12th heaven. 12वां स्वर्ग, यहां का इन्द्र शतार है।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष ]] == कर्म-मुक्ति : == पक्के फलम्हि पडिए, जह ण फलं बज्झए पुणो विंटे। जीवस्स कम्मभावे, पडिए ण पुणोदयमुवेइ।। —समयसार : १६८ जिस प्रकार पका हुआ फल गिर जाने के बाद पुन: वृन्त से नहीं लग सकता, उसी प्रकार कर्म भी आत्मा से विमुक्त होने के बाद पुन: आत्मा (वीतराग) को…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रभास (स्वर्ग)- अनुदिस स्वर्ग के श्रेणीबद्ध 4 विमानों में उŸार दिष का विमान। Prabhasa (svarga)- Name of a heavenly abode
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्यावर्तित- प्रतिवर्तित, लौटा हुआ। pratyavartita – reverted, returned
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == मुमुक्षु : == मिच्छत्तासवदारं रुंभइ सम्मत्तदिढकवाडेण। हिंसादिदुवाराणि वि, दिढवयफलिहेहिं रुंभति।। —जयधवला : १-१०-५५ मुमुक्षु जीव सम्यक्त्व रूपी दृढ़ कपाटों से मिथ्यात्व रूपी आस्रव द्वार को रोकता है तथा दृढ़ व्रत रूपी कपाटों से हिंसा आदि द्वारों को रोकता है।