नेमिनाथपुराण!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नेमिनाथपुराण – Neminaathapuraana. A book written by brahmchari Nemidatta. ब्र. नेमिदत्त (ई. 1528) कृत एक संस्कृत ग्रंथ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नेमिनाथपुराण – Neminaathapuraana. A book written by brahmchari Nemidatta. ब्र. नेमिदत्त (ई. 1528) कृत एक संस्कृत ग्रंथ “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == साहसी : == जाव य ण देन्ति हिययं पुरिसा कज्जाइं ताव विहणंति। अह दिण्णं तिय हिययं गुरुं पि कज्जं परिसमत्तं।। —कुवलयमाला जब तक साहसी पुरुष कार्यों की तरफ अपना ध्यान नहीं देते, तभी तक कार्य पूरे नहीं होते हैं। किन्तु उनके द्वारा कार्यों के प्रति हृदय लगाने से…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शीतल वायु – Sheetala Vaayu. One of the 14 divinely excellences of lord arihant- gentel breeze (wind). अरहंत के देवकृत 14 अतिशयों में एक अतिशय; वायु कुमार देव द्वारा शीतल पवन चलाना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नृत्यगोष्ठी – Nrityagoshthee. Recreation; To organise dance programme. प्राचीन मनोरंजन का एक प्रमुख साधन; उत्सवों पर नृत्य गोष्ठियाँ की जाती थी “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == गुणी : == लच्छीए विणा रयणायरस्स गम्भीरिमा तहज्जेव। सा लच्छी तस्स विणा कस्स न गेहे परिब्भई।। —गाहारयणकोष : ४५ लक्ष्मी के बिना भी रत्नाकर की गंभीरता तो वैसी ही बनी हुई है, किन्तु सागर को छोड़कर चली गई लक्ष्मी को कहाँ—कहाँ नहीं भटकना पड़ता ? ठाणेसु गुणा पथड़ा ठाणाणि,…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नील (नाम) – Neela (Naama). Name of the initiation-forest of lord Munisuvratnath a king of vanara dynasty. भगवान मुनिसुव्रतनाथ के दीक्षा वन का नाम, वानर वंश का एक राजा “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शिवनंदि – Shivanandi. Name of a Bhattarak of Nandi group. नंदिसंघ बलात्कारगण वारां (राजस्थान) की गद्दी के एक भट्टारक ” समय- वि. 1148 “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नीच – Neecha. People from low caste, low-caste group. निम्न, नीच गोत्र व नीच कुल आदि “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव (सचित्त , अचित्त , मिश्र ) – Bhava(Sachitta, Achitta, Mishra). Reflections. जीव द्रव्य सचित भाव है , पुदगल आदि ५ द्रव्य अचित भाव हैं एंव पुदगल और जीव द्रव्यों का संयोग मिश्र भाव है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वचन विवेक –Vachan Vivek : Wishful speaking ,Conscious speech. विवेक का एक भेद ;क्रोधादि कषाय उत्पन्न होने पर मैं मारूंगा इत्यादि वचन का प्रयोग न करना “