दर्शनशुद्धि (शास्त्र)!
दर्शनशुद्धि (शास्त्र) A book written by Acharya ‘Chandraprabh Suri’. आचार्य चन्दप्रभ सूरि (ई.1102) द्वारा रचित एक न्याय ग्रन्थ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दर्शनशुद्धि (शास्त्र) A book written by Acharya ‘Chandraprabh Suri’. आचार्य चन्दप्रभ सूरि (ई.1102) द्वारा रचित एक न्याय ग्रन्थ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वर्द्धमान महावीर – Varddhmaana Mahaveera.: Name of 24th tirthankar (Jain-Lord). वर्तमान चौबीसीके अंतिम 24वें तीर्थंकर “कुण्डलपुर के राजा सिद्धार्थ एवं महारानी त्रिशला के पुत्र “इनकी आयु 72 वर्ष थी एवं इनके 11 गणधर थे “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचज्ञान – Panchagyaana. Five kinds of knowledge (sensory, scriptural, clairvoyanc, telepathic & omniscience). मति, श्रुत, अवधि, मनःपर्यय एवं केवलज्ञान यही पंचज्ञान प्रणाम कहलाते है “
तेजोजराशि A mathematical quantity, A chief disciple of Lord Rishabhdev. जिस राशि को चार से अवहृत (भाग) करने पर शेष तीन अंक रहते हैं, भगवान ऋषभदेव का 62 वां गणधर (तेजोराशि)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुर्यप्रभा – Suryaprabh. Name of the parasol of Chakravarti (emperor) Bharatesh. सूर्य की 4 अग्रदेवियों (पट्ट देवियों) में चैथी देवी, तीर्थकर पुष्पदंतनाथ की दीक्षा षिविका, इसी में बैठकर ये दीक्षा लेने पुष्पक वन गये थे।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंच अस्तिकाय – Pancha Astikaaya. Five kinds of universal entities. जीव, पुदगल, धर्म, अधर्म और आकाश यें पांच अस्तिकाय कहलाते है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विद्य – Vidha. Type, Part, manner, Pierce. प्रकार, भेद, छेद, अंश, पर्याय, भाग भंग, आदि शब्द एकार्थवाची हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुंज – Pumja. Accumulation, Offering of fistful rice before the Jaina Lord. समूह, भगवान के सामने बंधी मुठ्टी से चावल चढ़ाना पुंज कहलाता है “
तैजस शरीर बंध A kind of bond of lustrous molecules (reg. body). 5 प्रकार के बंधन नामकर्म के भेदों में एक भेद, गृहीत तैजस पुद्गल स्ंकधों का परस्पर मिल जाना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यथाच्छंद श्रोता–Yathachchhand Shrota. Self–willed type of listener. श्रोता का एक प्रकार” स्वच्छंद प्रवत्ति करने वाला श्रोता जिसे विद्या देना संसार व भय को ही बढ़ाना है”