रजस्वला स्त्री!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रजस्वला स्त्री – देखे – पुश्यवती स्त्री Rajasvala Stri-Menstrous women
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रजस्वला स्त्री – देखे – पुश्यवती स्त्री Rajasvala Stri-Menstrous women
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुंडन– Mundan. The first ceremonial shaving of a child’s head, Restraining over senses, mind etc. बच्चो के सिर मुंडाना आदि क्षौर कर्म अथवा मुंडन का अर्थ निरोध करना है” पाँच इन्द्रियो का मुंडन, वचनमुंडन, हाथ, पैरऔर शरीर का मुंडन तथा मन का मुंडन ये दश मुंडन है”
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूलगुण–Mulguna. Basic restraints or virtues of devotees, saints etc. श्रावक, साधु आदि के मूलभूतनियमएवं मुख्य गुणों को मूलगुण कहते है” श्रावक के 8(देखे– अष्टमूलगुण) एवं साधुओ के 28 मूलगुण (5 महाव्रत, 5 समिति, 5इन्द्रियनिरोध, 6 आवश्यक, 7 विशेष–आचेलक्य, केशलोच,भुमिशायन, अस्नान, अदंतधवन, झाडे होकर भोजन करना, एक बार भोजन करना) होते है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रम्यक क्षेत्र – जम्बुद्वीप के क्षेत्रों मे नील रूक्मि कुलाचल के मघ्य स्थित 5 वां क्षेत्र। यहां मघ्यम योग भूमि रहती है। Ramyaka ksetra-Name of the 5th region of jambudvip (island)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वट वृक्ष-Vata Vraksha The Banyan tree under which Lord Rishabhdev got initiated and obtained omniscience. बरगद का पेड़ ,तीर्थंकर ऋषभदेव का दीक्षा एवम केवलज्ञान वृक्ष “युग के आदि में भगवान ऋषभदेव ने प्रयाग (इलाहाबाद ) में वटवृक्ष के निचे जैनेश्वरी दीक्षा ली थी “आज भी प्रयाग के मिलिट्री क्षेत्र में स्थित अक्षयवटवृक्ष भगवान के…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नैष्ठिक श्रावक – Naishthika shraavaka. Pledged votary following the rules of 5th stage of spiritual development (5th Gunsthan). पंचम गुणस्थानवर्ती देशव्रती श्रावक “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शील – Sheela. Virtuous and moral conduct. दान, पूजा, शील, उपवास गृहस्थों के इन 4 धर्मों में से एक ” दया, व्रतों की रक्षा, ब्रह्मचर्य एवं सदगुणोंका पालन करना शील कहलाता है ” अथवा व्रतों की रक्षा करने वाले 3 गुणव्रत एवं 4 शिक्षाव्रत को शील कहते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नैगमनय – Naiamanya Figurative standpoint that indicates circumstatial knowledge 7 नयों में प्रथम नय; यह अनिष्पत्र अर्थ में संकल्प मात्र को विषय करता है ” जैसे-किसी मनुष्य को पापी लोगों का समागम करते हुए देखकर नारकी कहना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वज्रचमर – Vajrachmar Name of the first chief disciple of Lord Padmaprabhu. तीर्थंकर पद्मप्रभु ले प्रथम गणधर, अपरनाम वज्रचमर था “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नेमिचन्द्र भट्टारक – Nemichandra bhattaaraka. See – Nemichandra. देखें – नेमिचंद्र “