शवशय्यासन तप!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शवशय्यासन तप – Shavasayyaasana Tapa. A kind of austerity, to lie like a corspe. कायाक्लेश तप का एक भेद; शव की तरह निश्चेष्ट सोना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शवशय्यासन तप – Shavasayyaasana Tapa. A kind of austerity, to lie like a corspe. कायाक्लेश तप का एक भेद; शव की तरह निश्चेष्ट सोना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नाना-जीव नाना-अजीव – Nana-Jiva Nana-Ajiva Theory of many animates and inanimates अनेक जीव और अनेक अजीव ”
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == श्रद्धा : == जं सक्कइ तं कीरइ, जं न सक्कइ, तयम्मि सद्दहणा। सद्दहमाणो जीवो, वच्चइ अयरामरं ठाणं।। —धर्म संग्रह : २-२१ जिसका आचरण हो सके, उसका आचरण करना चाहिए एवं जिसका आचरण न हो सके, उस पर श्रद्धा रखनी चाहिए। धर्म पर श्रद्धा रखता हुआ जीव भी जरा…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शरीरी – Shareeree. Having to do with the body, A living creature. जीव संसारावस्था में शरीर सहित होने पर शरीरी कहलाता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नागार्जुन – Nagarjuna A great personality of Bauddha, Name of a writer of Ayurved. एक बौध विद्वान (आचार्य पूज्यपाद स्वामी से प्राप्त पघावती मंत्र को सिद्ध करके इन्होने स्वर्ण बनाने की विघा प्राप्त की)” कर्नाटक जैन कवी-वैघक शाश्त्र में पारंगत एवं नागार्जुन कल्प आदि वैघक गंथ्रो के कर्ता ”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मनुष्यणी- Manushyanii. Woman , female sex. मनुष्यिनी या स्त्री “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोकोत्तर गणना –Lokottara Gananaa The universal calculations ,super calculations . गणना प्रमाण के दो भेदों में एक भेद ;द्रव्य ,क्षेत्र ,काल ,भाव इसके 4 भेद हैं “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == व्यसन : == जूयं मज्जं मंसं वेसा पारद्धि—चोर—परयारं। दुग्गइगमणस्सेदाणि हेउभूदाणि पावाणि।। —वसुनंदीश्रावकाचार : ५९ जुआ खेलना, मदिरापान, मांसाहार, वेश्यागमन, शिकार खेलना, चोरी करना और परस्त्रीगमन करना, ये पाप की ओर तथा दुर्गति में ले जाने के कारण हुआ करते हैं।
आहारक मार्गणा An investigation stage expressed about assimilative (Aharak) and non – assimilative (Anaharak) state of beings. 14वीं मार्गणा जिसमें जीवों के आहारक व अनाहारक का कथन है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बैल – Baila. Bullock, significant mark of Lord Rishabhdeva. Also of Lord Simandhar and Suriprabh situated in Videhkshetra (region) , one of the 16 dream- marks of Tirthankar’s (Jaina Lord’s ) mother . ऋषभदेव भगवान का चिन्ह , विदेहक्षेत्र में स्थित तीर्थकर सीमंधर एंव सुरिप्रभ का चिन्ह , तीर्थकर की माता के…